शातिर इंजीनियर के खातों में जा रहा था टोल का पैसा, 14 राज्यों के 42 टोल प्लाजा में किया था सॉफ्टवेयर से ‘खेल’

लखनऊ: उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने NHAI के अतरैला टोल प्लाजा पर छापा मारकर देशभर में फैले टोल वसूली के नेटवर्क से घोटाले का पर्दाफाश किया है। यूपी एसटीएफ ने बुधवार को वाराणसी में 35 साल के इंजीनियर को देश भर में टोल टैक्स धोखाधड़ी के नेटवर्क का मास्टरमाइंड होने के आरोप में गिरफ्तार किया है। यह नेटवर्क 14 राज्यों में 42 टोल प्लाजा पर फैला हुआ था और दो साल से अधिक समय से टोल टैक्स की वसूली कर रहा था।

पुलिस धोखाधड़ी का पता लगाने की कोशिश कर रही है, लेकिन इसकी सीमा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अकेले मिर्जापुर के अतरौला टोल प्लाजा पर ही इस घोटाले के कारण एनएचएआई को रोजाना 45,000 रुपये का नुकसान हो रहा था।

सॉफ्टवेयर चलता था पूरा गेम
प्रोग्रामर और टोल प्लाजा के पूर्व कर्मचारी आलोक कुमार सिंह ने एक अवैध सॉफ्टवेयर सिस्टम बनाया, जो टोल को गैंग के सदस्यों के निजी बैंक खातों में भेज देता था। सॉफ्टवेयर का मकसद बिना फास्टैग वाले या कम फास्टैग बैलेंस वाले वाहन थे, जिनसे आमतौर पर दोगुना टोल वसूला जाता है।

नकली रसीदों से नहीं पता चला घोटाला
उसने एक अनधिकृत प्रोग्राम बनाया, जो एनएचएआई के आधिकारिक सॉफ्टवेयर के साथ-साथ काम करता था। नकली रसीदें एनएचएआई की रसीदों की नकल थीं, जिससे घोटाले का पता लगाना मुश्किल हो गया। सिंह ने टोल प्लाजा प्रबंधकों और आईटी कर्मियों के साथ मिलकर टोल बूथ सिस्टम पर सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किया।

यूपी, एमपी समेत 14 राज्यों के टोल प्लाजा पर ठगी
डायवर्ट किए गए टोल कलेक्शन को सिंह, टोल प्लाजा संचालकों और अन्य सहयोगियों के बीच साझा किया जाता था। सिंह ने 42 टोल प्लाजा पर खुद ही सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने की बात स्वीकार की। इनमें यूपी में नौ टोल प्लाजा, एमपी में छह, राजस्थान, गुजरात और छत्तीसगढ़ में चार-चार, महाराष्ट्र और झारखंड में तीन-तीन, पंजाब, असम और बंगाल में दो-दो और जम्मू, ओडिशा, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना में एक-एक टोल प्लाजा शामिल हैं।

ऐसे नहीं पकड़ पाया एनएचएआई
एसटीएफ ने धोखाधड़ी के लिए मिर्जापुर के शिवगुलाम टोल प्लाजा मैनेजर राजीव कुमार मिश्रा और टोल कर्मचारी मनीष मिश्रा को भी गिरफ्तार किया है। सिंह ने अपने बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट के जरिए कमाई को सफेद करने की बात कबूल की। बचने के लिए, उसने तय किया कि एनएचएआई के आधिकारिक सॉफ्टवेयर में गैर-फास्टैग वाहनों से केवल 5% टोल दर्ज किए जाएं। बाकी को छूट प्राप्त या अपंजीकृत के रूप में दर्ज किया गया था।

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