





बालोद: छत्तीसगढ़ में इन दिनों पंचायत सचिव हड़ताल पर हैं. इस हड़ताल का सबसे ज्यादा नुकसान सरपंचों को उठाना पड़ रहा है. दरअसल नए सरपंचों के पदभार ग्रहण करते ही सचिव हड़ताल पर चले गए हैं. ऐसे में पहली बार सरपंच बने लोगों को कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर काम कैसे करें. यही वजह है कि पंचायती राज व्यवस्था गड़बड़ाई हुई है.
नए सरपंचों को हो रही दिक्कत: छत्तीसगढ़ त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन के बाद से पंचायत में दो तरह के सरपंच चुने गए. एक वह सरपंच जो पहले भी सरपंच रहते हुए कार्यभार संभाल चुके हैं. ऐसे सरपंचों को पंचायत में काम करने का तौर तरीका पता है और वो सचिवों की हड़ताल के बावजूद किसी तरह पंचायत का काम चला रहे हैं. वहीं दूसरी तरह के सरपंच वह भी हैं, जो पहली बार चुनाव जीतकर आए हैं. उन्हें नहीं पता कि कहां कैसे खर्च करें या फिर कौन सा काम कैसे करना है.
“लोग रोज आ रहे हैं घर, नहीं कर पा रहे काम”: बोहारडीह पंचायत के सरपंच राजेंद्र साहू कहते हैं कि ”मैं पहली बार सरपंच निर्वाचित हुआ हूं. मुझे कामकाज का कोई भी अनुभव नहीं है.” उन्होंने बताया कि गांव के लोग रोजाना घर आते हैं. प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए भी सर्वे का काम खुद ही कर रहा हूं. गांव में मूलभूत कई सारी चीज रहती है. छोटे मोटे काम करवाने हैं, जिसके लिए बिल की आवश्यकता होती है. यह सब काम कर पाने में हम असमर्थ हैं.
“जनता की समस्या नहीं सुलझा पा रहे”: ग्राम भीमकंहार की सरपंच अश्विनी बाई ने बताया कि जैसे ही हम चुनाव जीत कर आए हैं, इसके बाद से एक बार भी ग्राम सभा नहीं हुई है. विवाह पंजीयन, पेंशन का काम रुका हुआ है.
ग्राम पंचायत भूलन डबरी सरपंच डोमन लाल साहू ने बताया कि सचिव की हड़ताल से सब काम रूके हुए हैं. सरकार को कोई व्यवस्था ऐसी भी बनानी चाहिए, जहां सचिव के बिना भी सरपंच काम कर पाएं.