अब हाथ की बांह में लगे शुगर मॉनिटर पैच के जरिये पूरे दिन की शुगर रिपोर्ट मरीज के मोबाइल पर आसानी से उपलब्ध रहेगी। मरीज को पता चल सकेगा कि उसका शुगर क्या-क्या खाने से ऊपर नीचे हो रहा है। इससे वह अपने खानपान में परिवर्तन करके शुगर को नियंत्रित कर सकता है।
वर्तमान में डायबिटीज के लेवल की जानकारी लेने के लिए मुख्य रूप से खाली पेट रक्त शर्करा परीक्षण, रैंडम रक्त शर्करा परीक्षण, एचबीए1सी परीक्षण (ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन) और ग्लूकोज सहिष्णुता परीक्षण किया जाता है।
इसके लिए ग्लूकोमीटर का इस्तेमाल करते हैं। कई बार परीक्षण में लापरवाही करने से शुगर बढ़ने और घटने का सही कारण पता नहीं चल पाता है। इसके मद्देनजर कैंटोनमेंट बोर्ड के छावनी सामान्य अस्पताल में मरीज के बांह या फिर जांघ में शुगर मॉनिटर पैच नामक माइक्रोचिप लगाई जा रही है।
इसे मोबाइल से जोड़ा जाता है। चिप में मरीज के साथ डाॅक्टर के मोबाइल को भी जोड़ा जाता है। मरीज जब अपने मोबाइल से चिप को टच करता है तो तुरंत शुगर की रिपोर्ट उसे व दूसरी रिपोर्ट डाॅक्टर के मोबाइल पर पहुंच जाती है।
एक समय के बाद इंसुलिन का उपयोग भी लगभग समाप्त हो जाता है। जिले में अब तक चार मरीजों को इंसुलिन सेंसर पैच लगाया गया है। इनमें दो मरीजों का इंसुलिंग बंद हो चुका है।
एक महीने करता है काम
शुगर मॉनिटर पैच की कीमत 2,500 रुपये है। एक बार लगाने पर एक महीने तक यह काम करता है। इसके बाद पैच को बदलना पड़ता है। छावनी अस्पताल अपने यहां रजिस्टर्ड मरीजों को यह पैच नि:शुल्क लगा रहा है।
इंसुलिन मॉनिटर पैच के जरिये मरीज अपना शुगर लेवल आसानी से नियंत्रित कर सकता है। सही डायट और दवा के उचित इस्तेमाल से इंसुलिन से मरीज को छुटकारा मिल जाएगा। -डॉ. वैशाली सिंह, सीएमएस, छावनी सामान्य अस्पताल