पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में तेज बहाव में बह रहे करीब 3-4 दिन के हाथी के बच्चे को मछुआरों ने बचा लिया, उसके बाद का नाजारा ऐसा था कि देखने वालों का दिल जीत रहा है। बच्चा करीब 4 किलोमीटर तक बह गया था। वन विभाग की मदद से दो घंटे बाद उसे उसकी मां से मिलाया गया, जिसके बाद वह झुंड के साथ चला गया।




तेज बहाव में बहता एक नन्हा हाथी, पानी के ऊपर सिर्फ उसकी छोटी सी सूंड और उसे बचाने के लिए नदी की लहरों से जूझते मछुआरे… पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में तीस्ता नदी में सोमवार सुबह ऐसा ही दिल दहला देने वाला नजारा देखने को मिला। करीब 3-4 दिन का हाथी का बच्चा झुंड से अलग होकर नदी में बह गया था
गजोल्डोबा बैराज के पास हाथियों का झुंड तीस्ता नदी पार कर रहा था। इसी दौरान बच्चा तेज धारा की चपेट में आ गया और करीब 4 किलोमीटर तक बहता चला गया। तभी मछुआरों की नजर उस पर पड़ी। उन्होंने बिना देर किए नाव नदी में उतारी और तेज बहाव के बीच उसका पीछा करते हुए उसे नाव पर खींच लिया। छोटू गजराज ने दमभर कर सांस ली और देखा कि सब ठीक है तो अपनी सूंड से मच्छवारे को गले लगा लिया, नजारा देख सभी का दिल भर आ गया है। शायद इसी तरीके से गन्नू महाराज धन्यवाद कहना चाह रहे थे। इसके बाद वन विभाग की मदद से बच्चे को उसकी मां तक पहुंचाया गया तो बच्चे को देखते ही मां ने चिंघाड़ा और दुलारकर साथ ले गई।
सोमवार सुबह करीब 8:30 बजे नॉर्थ बंगाल फिशरमैन फोरम के मछुआरों ने नदी में कुछ बहता हुआ देखा। पास जाने पर पता चला कि वह हाथी का बच्चा है। मछुआरों ने दो छोटी नावों से उसका पीछा किया और करीब 4 किलोमीटर बाद उसे पकड़ लिया।
पानी से खींचकर नाव में लाया
तेज धारा के कारण बच्चा लगातार आगे बह रहा था। मछुआरों ने जोखिम उठाकर उसके पास नाव पहुंचाई और उसे खींचकर नाव में सुरक्षित लाया। इसके बाद बच्चे को काठमबाड़ी रेंज के वन अधिकारियों को सौंप दिया गया। वन विभाग ने भी मछुआरों के समय पर किए गए प्रयास की सराहना की।
