राम मंदिर में दान चोरी का मामला पिछले 15 दिनों से चर्चा में बना हुआ है. राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय भी सवालों में घिरे हैं. बिजनौर में जन्मे चंपत राय आरएसएस, विहिप और फिर राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं, आइए जानते हैं..






राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी अपनी प्रारंभिक जांच पूरी कर चुकी है. मंदिर में रोजाना करोड़ों रुपये के दान में कितनी हेराफेरी हुई और इसमें मंदिर ट्रस्ट के कौन से शख्स शामिल थे, इसका खुलासा जल्द हो सकता है. दान चोरी के इस चर्चित केस में श्री राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव और विहिप उपाध्यक्ष चंपत राय भी सवालों के घेरे में हैं. कभी उनका ड्राइवर रहा टिन्नू यादव इस केस के मुख्य आरोपियों में से एक है. चंपत राय करीब 35-40 वर्षों से राम जन्मभूमि आंदोलन और फिर राम मंदिर के निर्माण जुड़े रहे हैं. अयोध्या के चप्पे-चप्पे की गहरी समझ रखने वाले चंपत राय तो अयोध्या का पटवारी तक कहा जाता है. चंपत राय श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव और विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष हैं.
चंपत राय बंसल का जन्म 18 नवंबर 1946 को उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नगीना इलाके के एक साधारण परिवार में हुआ था. उनके पिता रामेश्वर प्रसाद बंसल और मां सावित्री देवी की 10 संतानों (6 भाई और 4 बहनें) में वो दूसरे नंबर पर हैं.पढ़ाई में अव्वल चंपत राय ने फिजिक्स-केमिस्ट्री में बीएससी-एमएससी के बाद धामपुर के डिग्री कॉलेज में ही प्रोफेसर बन गए. संघ से जुड़ने के बाद उन्होंने जीवन भर अविवाहित रहने का संकल्प लिया.
चंपत राय के पिता रामेश्वर प्रसाद भी संघ से जुड़े थे, लिहाजा चंपत राय भी कम उम्र में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में जाने लगे और उनके विचारों से गहराई से प्रभावित थे. बीबीसी रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 1975 में जब इंदिरा गांधी सरकार ने इमरजेंसी लगा दी तो RSS से जुड़े चंपत राय को भी गिरफ्तार कर लिया गया. उन्होंने यूपी की जेलों में करीब 18 महीने गुजारे. जेल से रिहाई के बाद उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी और संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बन गए. वो राम मंदिर आंदोलन में पूरी सक्रियता से जुट गए. चंपत राय 1980 में विश्व हिंदू परिषद (VHP) से भी जुड़े और कुशल संगठन क्षमता के कारण उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिली.
