साइबर ठगी का शिकार होने के बाद पीड़ित के लिए शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ठगी का पता चलते ही 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करने से रकम को ठग के खाते से आगे ट्रांसफर होने से रोकने और उसे होल्ड कराने की संभावना बढ़ जाती है। अब होल्ड कराई गई रकम को पीड़ित के खाते में वापस दिलाने की प्रक्रिया भी पहले के मुकाबले आसान की जा रही है।





नई व्यवस्था के तहत यदि ठगी की रकम में से 50 हजार रुपये तक की राशि ठग के खाते में होल्ड हो जाती है, तो पीड़ित को उसे वापस लेने के लिए FIR और कोर्ट के रिफंड आदेश की आवश्यकता नहीं होगी। पुलिस पहले रकम और मामले का सत्यापन करेगी। इसके बाद पीड़ित से क्षतिपूर्ति बांड लेकर राशि वापस कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
रायपुर में फिलहाल इसके लिए 100 रुपये का बांड लिया जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग स्थानों पर बांड की राशि अलग है। कुछ जगहों पर 1,000 रुपये तक का बांड लिए जाने की जानकारी है।
50 हजार से ज्यादा रकम पर FIR जरूरी
यदि किसी एक खाते में पीड़ित की 50 हजार रुपये से अधिक राशि होल्ड होती है, तो ऐसे मामले में FIR दर्ज करना आवश्यक होगा। इसके बाद संबंधित दस्तावेज और क्षतिपूर्ति बांड की प्रक्रिया पूरी कर रकम वापस दिलाने की कार्रवाई की जाएगी।
इसलिए लिया जाता है क्षतिपूर्ति बॉन्ड
होल्ड रकम लौटाने से पहले पुलिस पीड़ित से क्षतिपूर्ति बांड इसलिए लेती है, ताकि भविष्य में यदि उक्त राशि पर किसी अन्य व्यक्ति की वैधानिक दावेदारी सामने आए या अदालत किसी कारण से रकम वापस करने का आदेश दे, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति की रहे।
