इन संयंत्रों के पास कुल मिलाकर करीब 2.82 करोड़ टन कोयला उपलब्ध है, जबकि निर्धारित आवश्यकता लगभग 5.87 करोड़ टन मानी गई है। इस तरह वास्तविक भंडार मानक का केवल 48 फीसदी रह गया है। 85 फीसदी संयंत्र भार कारक के आधार पर यह भंडार लगभग 9 दिनों की जरूरत पूरी कर सकता है, जबकि सामान्य परिस्थितियों में करीब 19 दिनों का सुरक्षित भंडार अपेक्षित माना जाता है।





नियमों के अनुसार, जिन संयंत्रों के पास निर्धारित मानक का 25 प्रतिशत से भी कम कोयला बचता है, उन्हें क्रिटिकल श्रेणी में वर्गीकृत किया जाता है। गंभीर कमी का सामना कर रहे इन 50 संयंत्रों में से 45 संयंत्र घरेलू कोयले, 4 संयंत्र आयातित और एक संयंत्र कोयला धुलाई के अवशेष पर निर्भर है।
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संवेदनशील संयंत्रों पर नजर- कोयला मंत्रालय
कोयला मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सभी संवेदनशील संयंत्रों की एक अंतर-मंत्रालयी टीम द्वारा रोजाना निगरानी की जा रही है और उन्हें लगातार ईंधन भेजा जा रहा है।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सीईए के नियमों के तहत किसी प्लांट को क्रिटिकल घोषित करना एक नियमित निगरानी प्रक्रिया का हिस्सा है। इसका मतलब केवल यह है कि उन पर पैनी नजर रखी जाए और प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाए। इन संयंत्रों में कोयले की सप्लाई खत्म नहीं हो रही है।
