खजाना’ खोदकर इस देश ने खोज ली खुशहाली

यूरोप का एक छोटा सा देश है, जिसके पास बड़ा खजाना है। यही खजाना इस देश की खुशहाली का राज भी है। पीएम नरेंद्र मोदी नॉर्वे की राजधानी ओस्लो पहुंचे हैं, जहां वो तीसरे भारत-नॉर्डिक सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं।

यूरोप को एक छोटा सा देश है नॉर्वे, जहां के कुछ हिस्सों में छह महीने दिन और छह महीने रात रहती है। आज नॉर्वे एक दुनिया का बेहद खुशहाल देश है। वैसे नॉर्वे 7 जून, 1905 को स्वीडन से आजाद हो गया था। मगर, 1970 के दशक में एक बड़े खजाने यानी तेल और गैस की खोज ने इस छोटे से देश को अमीर देशों में शुमार कर दिया। पश्चिम एशिया संकट के दौरान तेल और गैस की किल्लत से जूझ रहे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी नॉर्वे के दौरे पर 18 मई, 2026 को राजधानी ओस्लो पहुंचे हैं। वह यहां तीसरे भारत-नॉर्डिक सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। वह नॉर्वे के पीएम जोनास गाहेर स्टोर से ट्रेड, एनर्जी और टेक्नोलॉजी पर चर्चा करने वाले हैं।

पीएम मोदी नॉर्वे पहुंच गए हैं। वह यहां तीसरे भारत-नॉर्डिक सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले हैं। नॉर्डिक देश वो कहे जाते हैं, जो उत्तरी यूरोप और आर्कटिक क्षेत्र में स्थित देशों और क्षेत्रों का एक विशिष्ट समूह है। मुख्य पांच नॉर्डिक देशों में डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे और स्वीडन शामिल हैं।

नॉर्वे में भारत की राजदूत ग्लोरिया गैंगटे ने कहा-’43 वर्षों के अंतराल के बाद भारत से किसी प्रधानमंत्री की नॉर्वे यात्रा हो रही है। यह प्रधानमंत्री मोदी की नॉर्वे की पहली यात्रा है और वैश्विक उथल-पुथल के माहौल में हो रही है। भारत-नॉर्वे संबंधों में भी काफी बदलाव आए हैं। इसलिए यह यात्रा संबंधों का जायजा लेने और भारत-EFTA-TEPA समझौते द्वारा प्रदान किए गए नए अवसरों की तलाश करने का एक अच्छा अवसर प्रदान करती है। यह समझौता चार EFTA देशों के साथ हस्ताक्षरित व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता है जो अब लागू हो चुका है। वास्तव में, यह बहुत दिलचस्प है कि TEPA समझौते में निवेश का भी प्रावधान है, जिसमें EFTA देशों द्वारा 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर के निवेश और 10 लाख नौकरियों के पैदा होने की बात कही गई है। यहां कई अवसर मौजूद हैं जिनका लाभ उठाया जा सकता है। वास्तव में, भारत में मौजूद कई नॉर्वेजियन कंपनियां भारत-ईएफटीए-टीईपीए समझौते द्वारा प्रदान किए गए इस अवसर का लाभ उठाना चाहेंगी।’

भारत-भारत-EFTA व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता (TEPA) एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौता है, जिस पर 10 मार्च, 2024 को हस्ताक्षर किए गए। यह 1 अक्टूबर, 2025 को लागू हुआ। यह समझौता भारत को यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के चार यूरोपीय देशों आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड से जोड़ता है।

1970 के दशक की बात है जब उत्तरी सागर (North Sea) में समंदर में प्राकृतिक खजाने के रूप में अपतटीय तेल और प्राकृतिक गैस की खोज हुई। इस खोज ने नॉर्वे की तकदीर बदलकर रख दी। आज नॉर्वे दुनिया के प्रमुख पेट्रोलियम निर्यातकों में से एक है। इसी पेट्रोलियम ने नॉर्वे को अमीर देशों में ला खड़ा किया है, जिसकी प्रति व्यक्ति आय काफी ज्यादा है।

पेट्रोलियम बेचकर हासिल की गई इस अकूत दौलत का इस्तेमाल नॉर्वे ने एक शानदार समाज कल्याणकारी व्यवस्था बनाने में की है, जिससे यह लगातार मानव विकास सूचकांक और विश्व खुशहाली सूचकांक में दुनिया के टॉप के देशों में है।

नॉर्वे में प्रति व्यक्ति जीडीपी (GDP Per Capita) करीब 66 लाख से 87 लाख भारतीय रुपये के बीच है। इस मामले में यह दुनिया में चौथे नंबर पर है। इसके अतिरिक्त, देश में प्रति व्यक्ति वार्षिक घरेलू आय लगभग 47,000 डॉलर सालाना है। यह दुनिया के सबसे धनी और उच्च जीवन स्तर वाले देशों में से एक है। वहीं, विश्व खुशहाली सूचकांक में भी नॉर्वे दुनिया में छठे नंबर पर है।

 

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