उत्तर मध्य रेलवे ने एक खास सोलर-असिस्टेड पैसेंजर कोच तैयार किया है, जिसकी छत पर सोलर पैनल लगाए गए हैं। इस नई तकनीक की मदद से हर कोच हर साल करीब 13,400 यूनिट स्वच्छ बिजली पैदा करेगा। इससे रेलवे को लगभग 2.80 लाख रुपये की सालाना बचत होगी।





प्रयागराज मंडल ने हाल ही में इस खास कोच को लॉन्च किया। कोच की छत पर 6.93 किलोवाट क्षमता के 21 सोलर पैनल लगाए गए हैं। इन पैनलों से हर साल करीब 13,400 यूनिट स्वच्छ बिजली तैयार होगी। इस बिजली का इस्तेमाल कोच के पंखे, लाइट और अन्य जरूरी उपकरण चलाने में किया जाएगा।
रेलवे के अनुसार, एक सोलर कोच से हर साल लगभग 2.80 लाख रुपये की बिजली लागत बचेगी। इसके अलावा यह तकनीक हर वर्ष करीब 11 टन कार्बन उत्सर्जन कम करेगी। यानी यह परियोजना आर्थिक बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी।
उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. शिवम शर्मा ने बताया कि जब सोलर पैनलों पर सूर्य की रोशनी पड़ती है, तो उससे बनने वाली बिजली पहले बैटरी बैंक में स्टोर होती है। बाद में उसी बैटरी से कोच के अंदर लगे पंखे और लाइट संचालित किए जाते हैं। इससे पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम होती है और हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिलता है।
मुख्य अभियंता पुलकित श्रीवास्तव ने बताया कि इस परियोजना में अधिकतर काम रेलवे के अपने संसाधनों से किया गया है। सोलर पैनलों को सीधे कोच की छत पर लगाया गया है, जिससे अलग ढांचे की जरूरत नहीं पड़ी। उन्होंने बताया कि झांसी स्थित रेलवे की दोनों बड़ी वर्कशॉप अब हर महीने दो सोलर कोच तैयार करेंगी। जैसे-जैसे इनका निर्माण होगा, उन्हें अलग-अलग ट्रेनों में शामिल किया जाएगा।
