






बालाघाट : एक पिता ने अपने तीन बेटों को पढ़ा-लिखाकर काबिल बनाया। तीनों शिक्षक बन गए, लेकिन उन्हीं में से एक ने जमीन के लिए रिकॉर्ड में पिता को मृत बता दिया। इसकी जानकारी जब उसके लगभग 100 वर्षीय पिता अनाराम को हुई तो उनके पांव तले जमीन खिसक गई। इससे आहत बुजुर्ग ने मंगलवार को जनसुनवाई में अपनी पीड़ा बताई। कलेक्टर ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। बालाघाट जिला मुख्यालय से करीब 65 किलोमीटर दूर उमरी गांव निवासी अनाराम भिमटे उम्रदराज होने के कारण किसी तरह चल पाते हैं।
किसानी कर तीनों बेटों को अच्छी शिक्षा दिलाई
जनसुनवाई में वह दूसरों का सहारा लेकर पहुंचे। नम आंखों से अधिकारियों ने बताया कि उनके तीन बेटे और दो बेटियां हैं। उन्होंने खेती-किसानी करके तीनों बेटों को अच्छी शिक्षा दिलाई। बड़ा बेटा प्रभुदास भिमटे (67) शिक्षक के पद से सेवानिवृत्त हो चुका है। मंझला बेटा प्रोफेसर है, छोटा बेटा भी शिक्षक है। तीनों उनसे अलग रहते हैं, इसलिए उन्हें इस उम्र में अपनी बेटियों के घर का सहारा लेना पड़ रहा है। एक बेटी दिव्यांग है तो दूसरी विधवा है, जो उनके साथ रहती हैं।
झूठ बोलकर दस्तावेज से हटाया नाम
अनाराम ने बताया कि करीब दो वर्ष पूर्व उनकी पत्नी कारन बाई की मृत्यु हो गई। इसके बाद बड़े बेटे प्रभुदास ने उससे कहा कि पटवारी को दो हजार रुपये देने पड़ेंगे। वह मां के बजाय आपका नाम जमीन के रिकॉर्ड में चढ़ा देगा। इसके बाद प्रभुदास ने पटवारी को बताया कि पिता का देहांत हो गया है।
अब बोले- बेटियों को दूंगा जमीन
अनाराम ने बताया कि उनकी लगभग सवा एकड़ भूमि है, जो सड़क किनारे है। लालच में बेटे ने उनके साथ ये छल-कपट किया है। उन्होंने कहा कि अब मैं ये जमीन बेटों को नहीं, बल्कि मुझे सहारा देने वाली दोनों बेटियों को दूंगा। बालाघाट के कलेक्टर मृणाल मीना ने बताया कि शिकायत की जांच के लिए एडीएम को निर्देशित किया है। जांच की जाएगी कि पुत्र ने किस तरह दस्तावेजों में गड़बड़ी कर पिता को मृत दर्शाया और पटवारी की इसमें क्या भूमिका है, फिर कार्रवाई की जाएगी।