पाकिस्तान के भाईजान अजरबैजान की इस छोटे से देश ने की पिटाई, देखता रह गया तुर्की

भारत पाकिस्तान तनाव के दौरान तुर्की के बाद पाकिस्तान का खुलकर साथ देने वाले देश अजरबैजान था. जहां दुनिया के बड़े-बड़े देश पाकिस्तान की तरफ झुकने से बच रहे थे, तब ये दो देश आतंक फैलाने वाले राष्ट्र को समर्थन दे रहे था. अब अजरबैजान की नाक में दम करने के लिए अर्मेनिया आगे आया है. बता दें भारत ने 2022 में अर्मेनिया के साथ डिफेंस डील की थी. जिससे अजरबैजान से खतरों को झेल रहे अर्मेनिया का सुरक्षा कवच मजबूत हुआ था.

अजरबैजान के रक्षा मंत्रालय ने एक प्रेस रिलीज में कहा, “13 मई को 20:45 से 21:30 (स्थानीय समय) तक, गोरस और चंबारक जिलों की दिशा में तैनात अर्मेनियाई सशस्त्र बलों ने अजरबैजानी सेना के ठिकानों पर रुक-रुक कर गोलीबारी की.” ये गोलाबारी ऐसे समय पर हुई है, जब अजरबैजान भारत और पाकिस्तान तनाव में ‘बैगानी शादी में अब्दुल्ला बन रहा है’. अर्मेनिया बलों की गोलीबारी के बाद तुर्की का भी कोई बयान नहीं आया, तुर्की हमशा अजरबैजान और पाकिस्तान का बड़ा भाई बनने की कोशिश करता है. इस गोलाबारी से भारतीयों में खुशी देखी गई है, क्योंकि वह एक पिछले हफ्ते से अजरबैजान का बॉयकॉट कर रहे हैं.

भारत-अर्मेनिया डिफेंस डील

अर्मेनिया ने भारत के साथ 2022 में एक डिफेंस डील साइन की थी. जिसके तहत भारत ने अर्मेनिया को एंटी-ड्रोन सिस्टम, एटीएजीएस टोड हॉवित्जर, टीसी-20 (एमएआरजी) व्हील्ड सेल्फ प्रोपेल्ड हॉवित्जर, अश्विन बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर और आकाश वायु रक्षा मिसाइल निर्यात किया था. भारत के साथ हुई इस डील अज़रबैजान की बेचैनी बढ़ गई थी और तभी से वह भारत से गुस्सा था.

आर्मेनिया-अज़रबैजान संघर्ष

नागोर्नो-काराबाख के विवादित क्षेत्र को लेकर आर्मेनिया-अजरबैजान में लंबे समय से संघर्ष चल रहा है, जो अजरबैजान के भीतर एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें अर्मेनियाई आबादी का बहुमत है. यह संघर्ष दशकों से चल रहा है, जिसमें लड़ाई के दौर और एक जटिल इतिहास शामिल है. वहीं पाकिस्तान के साथ-साथ तुर्की और इजराइल भी इस संघर्ष में शमिल हैं.

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