PM Kisan Yojana के लाभार्थियों को मोदी सरकार का बड़ा तोहफा, अब हर किस्त में मिलेंगे बढ़े हुए पैसे

किसानों के चल रहे आंदोलन के बीच सरकार को एक बड़ी सिफारिश मिली है. संसदीय समिति ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना के तहत किसानों को मिलने वाली राशि को सालाना 6000 रुपये से बढ़ाकर 12000 रुपये करने का सुझाव दिया है. यह सिफारिश कृषि मंत्रालय से जुड़ी संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष चरणजीत सिंह चन्नी की अध्यक्षता में की गई है.

17 दिसंबर 2024 को लोकसभा में कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय से संबंधित डिमांड फॉर ग्रांट्स प्रस्तुत करते हुए चन्नी ने इस रिपोर्ट को साझा किया. इसमें कहा गया कि समिति की सिफारिश है कि पीएम किसान सम्मान योजना के तहत दी जाने वाली रकम की सीमा को दोगुना करके 12000 रुपये सालाना कर दिया जाए.

MSP के लिए रोडमैप की आवश्यकता

समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कृषि मंत्रालय को किसानों को कानूनी तौर पर MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की गारंटी देने के लिए जल्द एक रोडमैप तैयार करना चाहिए. इसके साथ ही कृषि से जुड़ी व्यापार नीतियों की घोषणा से पहले किसानों के प्रतिनिधियों से विचार-विमर्श करना जरूरी है. क्योंकि कृषि उत्पादों पर अंतरराष्ट्रीय आयात-निर्यात नीतियों के बदलते प्रभाव के कारण किसानों को नुकसान हो सकता है.

खेत मजदूरों के लिए राष्ट्रीय आयोग की सिफारिश

समिति ने कृषि लागत और मूल्य आयोग (MSP) की तर्ज पर एक स्थायी संस्था बनाने की सिफारिश की है. जिसमें कृषि विशेषज्ञों और किसानों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए. इसके अतिरिक्त समिति ने किसानों और खेत मजदूरों के लिए कर्ज माफी योजना और न्यूनतम जीवनयापन मजदूरी के लिए राष्ट्रीय आयोग की स्थापना की सिफारिश की है.

कृषि बीमा योजना की सिफारिश

समिति ने यह भी सुझाव दिया कि सरकार को प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) की तर्ज पर छोटे किसानों के लिए अनिवार्य सार्वभौमिक फसल बीमा योजना पर विचार करना चाहिए. खासतौर पर 2 हेक्टेयर तक कृषि भूमि वाले किसानों को इससे लाभ मिल सकता है.

कृषि मंत्रालय के नाम में बदलाव की सिफारिश

समिति ने कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय का नाम बदलने की भी सिफारिश की है. समिति का सुझाव है कि इसे ‘कृषि किसान और खेत मजदूर कल्याण विभाग’ नाम दिया जाए, ताकि कृषि प्रशासन को अधिक व्यवस्थित किया जा सके और खेती-किसानी में लगे लोगों की विभिन्न जरूरतों पर ध्यान केंद्रित किया जा सके. इससे भारत में कृषि विकास के लिए समावेशी दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलेगा.

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