उत्तराखंड में तबाही: फटा बादल, घरों में घुसे पत्थर और मलबा

उत्तराखंड में तबाही: फटा बादल, घरों में घुसे पत्थर और मलबा

देहरादून . देवभूमि उत्तराखंड में एक बार फिर बादल कुदरत अपना कहर बरपाने लगी है। जहां बादल फटने से भारी तबाही मची हुई है। देहरादून से लेकर देवप्रयाग तक जगह-जगह मलबा और कीचड़ नजर आ रहा है। कई रिहायशी इलाकों में पहाड़ से टूटकर चट्टाने  लोगों के घरों पर जा गिरीं। वहीं कई दुकानें भी इस तबाही में ध्वस्त हो गई हैं। गनीमत रहीं कि इस तबाही में किसी की जान नहीं गई।

किसी तरह लोग अपने घरों से मलबा और पत्थर हटाते हुए।

दरअसल, मंगलवार रात बादल फटने की वजह से करीब 7 घंटे मूसलाधार बारिश हुई। जिसके चलते तबाही जैसा मंजर दिखने लगा। ऐसा जलसैलाब आया कि सड़क से लेकर लोगों को घरों तक में पानी भर गया। पूरी रात तबाही के इलाके के लोग सो नहीं सके। हालात बेकाबू हो गए। रात को ही एनडीआरफ टीम मौके पर पहुंच गई।

किसी तरह लोग अपने घरों से मलबा और पत्थर हटाते हुए।

दरअसल, मंगलवार रात बादल फटने की वजह से करीब 7 घंटे मूसलाधार बारिश हुई। जिसके चलते तबाही जैसा मंजर दिखने लगा। ऐसा जलसैलाब आया कि सड़क से लेकर लोगों को घरों तक में पानी भर गया। पूरी रात तबाही के इलाके के लोग सो नहीं सके। हालात बेकाबू हो गए। रात को ही एनडीआरफ टीम मौके पर पहुंच गई।

दरअसल, मंगलवार रात बादल फटने की वजह से करीब 7 घंटे मूसलाधार बारिश हुई। जिसके चलते तबाही जैसा मंजर दिखने लगा। ऐसा जलसैलाब आया कि सड़क से लेकर लोगों को घरों तक में पानी भर गया। पूरी रात तबाही के इलाके के लोग सो नहीं सके। हालात बेकाबू हो गए। रात को ही एनडीआरफ टीम मौके पर पहुंच गई।

दरअसल, मंगलवार रात बादल फटने की वजह से करीब 7 घंटे मूसलाधार बारिश हुई। जिसके चलते तबाही जैसा मंजर दिखने लगा। ऐसा जलसैलाब आया कि सड़क से लेकर लोगों को घरों तक में पानी भर गया। पूरी रात तबाही के इलाके के लोग सो नहीं सके। हालात बेकाबू हो गए। रात को ही एनडीआरफ टीम मौके पर पहुंच गई।

बारिश का पानी और मलबा घरों में घुसने की वजह से लोग रातभर सो नहीं सके। वह घरों से पानी बाहर निकालते रहे और अपना सामान बचाने में लगे रहे। बादल फटने की सूचना खाबड़वाला क्षेत्र में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी मौके पहुंचे और राहत एंव बचाव का कार्य शुरू करवायातेज बारिश के चलते कई नदियां उफान पर आ गईं। जिसके चलते पानी नदियों से निकलकर लोगों को घरों में घुसने लगा। सुबह जब नदियों का जलस्तर कम होना शुरू हो गया था, जिसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली।

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