28 सितम्बर रायपुर तुता-मंत्रालय चलो का आह्वान





भिलाई। श्रमिक नेता शहीद शंकर गुहा नियोगी व शहीद ए आजम भगत सिंह के जन्मदिवस पर 28 सितंबर को भिलाई सहित छत्तीसगढ़ के सफाई कामगार मंत्रालय कूछ की तैयारी में हैं। सफाई कामगारों की विभिन्न मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा मजदूर कार्यकर्ता समिति, नगरीय निकाय जनवादी सफाई कामगार यूनियन, मेहनतकश आवास अधिकार संघ, महिला मुक्ति मोर्चा व प्रगतिशील युवा संघ के तत्वाधान में रायपुर तुता से मंत्रालय चलो का आह्वान किया गया है।
इस संबंध में रविवार को मजदूर संघठनों के प्रतिनिधियों द्वारा प्रेस वार्ता ली गई। इस दौरान श्रमिक नेताओं मेहनतकश मजदूरों व सफाई कामगारों पर अफसरों व ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे शोषण के बारें में बताया। प्रेसवार्ता के दौरान श्रमिक नेता मनोज कोसरे व कलादास डहरिया ने आगामी 28 सितंबर के कार्यक्रम के संबंध में विस्तार से बताया। श्रमिक नेताओं ने कामगारों से आह्वान किया करते हुए कहा कि अपने हक के लिए रायपुर तुता से मंऋलय तक चलो। इसके लिए श्रमिक नेता शहीद शंकर गुहा नियोगी व शहीद ए आजम भगत सिंह के जन्मदिवस 28 सितंबर का दिन चुना गया है।
श्रमिक नेताओं ने कहा है कि सरकारें लगातार ऐसे कानून और नीतियाँ बना रही हैं, जिनका फायदा मजदूरों और आम जनता से ज्यादा पूंजीपतियों और बड़े उद्योगपतियों को मिल रहा है। पूरा तंत्र पूंजीपतियों के पक्ष में खड़ा दिखाई देता है। मजदूर को उसके काम का वाजिब हक और सम्मानजनक मजदूरी नहीं मिलती। ठेकेदार अपनी मनमानी करता है और कहता है -“जो मिल रहा है, उसी में खुश रहो, वरना काम से निकाल दिए जाओगे।” और जब मजदूर अपने हक के लिए संगठित होकर आवाज उठाता है, तो उसकी आवाज दबाने की कोशिश की जाती है। संघर्ष करने वाले मजदूरों को बदनाम किया जाता है, डराया जाता है और कई बार जेल तक भेज दिया जाता है। संगवारी हो, यह कैसी व्यवस्था है? सुई से लेकर हवाई जहाज तक, सड़क से लेकर बड़ी-बड़ी इमारतों तक, फैक्ट्री से लेकर मोटर-कार तक-हर निर्माण और हर उत्पादन के पीछे मजदूर का पसीना है। मजदूर के बिना कोई कारखाना नहीं चल सकता, कोई सड़क नहीं बन सकती, कोई शहर नहीं बस सकता। लेकिन विडंबना यह है कि देश बनाने वाला यही मजदूर आज सबसे ज्यादा हाशिए पर है।
श्रमिक नेताओं ने कहा कि सफाई कामगार अपनी जान जोखिम में डालकर समाज को स्वच्छ रखते हैं। वे नालियां साफ करते हैं, सड़कों पर झाडू लगाते हैं, कचरा उठाते हैं, मरे हुए जानवरों को हटाते हैं और कई बार अपनी जान की परवाह किए बिना सीवरेज के गड्डों में उतरकर मल-मूत्र साफ करते हैं। कितनी ही बार जहरीली गैस और असुरक्षित परिस्थितियों के कारण सफाई मजदूरों की जान चली जाती है। फिर भी इन मेहनतकश सफाई कामगारों को आज भी छुआछूत और सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है। नगरीय निकायों में काम करने वाले महिला और पुरूष सफाई मजदूरों को जीने लायक वेतन तक नहीं मिलता। कई जगह बमुश्किल 8-9 हजार रूपये मिलते हैं और वह भी नियमित रूप से नहीं। 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर भी छुट्टी और उसका उचित लाभ नहीं मिलता।
सुरक्षा उपकरणों के बिना जान जोखिम में डालकर काम करना पड़ता है। ठेकेदारों की दादागिरी और मनमानी चरम पर है। गाली-गलौज, धमकी और नौकरी से निकाल देने का डर रोजमर्रा की बात बन गई है। “क्या सफाई मजदूर इंसान नहीं है? क्या उनके परिवार को सम्मान से जीने का अधिकार नहीं है ?” हम पूछना चाहते हैं-जो मजदूर पूरे शहर को साफ रखता है, उसकी जिंदगी इतनी गंदी और असुरक्षित क्यों रखी गई है ? अब चुप रहने का समय नहीं है! इसीलिए इस वर्ष हम 11 सूत्रीय मांगों को लेकर रायपुर तुता पहुंचेंगे और वहां से मंत्रालय की ओर रैली निकालकर सरकार के सामने अपनी आवाज बुलंद करेंगे। हम केवल मजदूरों की ही नहीं, बल्कि जल-जंगल-जमीन, शिक्षा, रोजगार, किसान, महिला, छात्र और नौजवानों के ज्वलंत सवालों को भी सरकार के सामने रखेंगे।
इन मांगों को लेकर मंत्रालय कूछ की है तैयारी
1. मजदूरों को जीने लायक न्यूनतम वेतन रूपये 26000/- निर्धारित करो।
2. सफाई मजदूरों को सभी आवश्यक सुरक्षा उपकरणों सहित नियमित करो।
3. पूर्व के श्रम कानूनों को सशक्त कर प्रभावी ढंग से लागू करो और चारों श्रम संहिताओं को रद्द करो।
4. हॉस्पिटल सेक्टर सहित सभी शहरी गरीब बस्तियों को उजाड़ना बंद करो।
5. हसदेव अरण्य सहित छत्तीसगढ़ के जंगलों का विनाश बंद करो।
6. एसीसी सहित सभी सीमेंट प्लांटों में सीमेंट वेज बोर्ड लागू करो।
7. किसानों के लिए एम एस पी गारंटी कानून पास करो।
8. भारत-अमेरिका ट्रेड डील से बाहर आओ।
9. शिक्षित बेरोजगारों को रोजगार दो।
10. 57 हजार शिक्षकों की भर्ती करो।
11. मजदूरों, किसानों, महिलाओं, छानें और नौजवानों के ज्वलंत सवालों का तत्काल समाधान करो। संगवारी हो !
