जांच में यह बात सामने आई कि आरोपियों ने 13 जुलाई को ही कलर प्रिंटर खरीदा था. इसके बाद रामप्रसाद ने नए बस स्टैंड के पास एक कमरा किराए पर लिया था, जहां तीनों मिलकर गुप्त रूप से जाली नोट छाप रहे थे.





छत्तीसगढ़ की कबीरधाम जिला पुलिस ने एक बड़े गैंग का पर्दाफाश किया है, जो नकली नोटों को छापकर मार्केट में खपाने की कोशिश रहा था. इनके पास से कुल 12.50 लाख रुपये के नकली नोट मिले हैं. साथ में रंगीन प्रिंटर, मोबाइल और एक इलेक्ट्रिक कार बरामद हुई है. तीनों आरोपियों ने नकली नोटों को पिछले महीने जुलाई में कलर प्रिंट से छापा था.
पुलिस ने बताया कि खुलासा तब हुआ, जब कमराखोल गांव के रहने वाले दिनेश कुमार यादव ने पोंडी चौकी में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें बताया कि उसने अप्रैल में घुरवा राम को 3.75 लाख रुपये उधार दिए थे. रकम वापस मांगी तो घुरवा राम ने सतीश कुमार के माध्यम से पैसे भेजने की बात कही.
फिर सतीश ने पैसे देने के लिए पोंडी स्थित शराब भट्ठी के पास बुलाया. जब 9 अगस्त की रात करीब 9 बजे दिनेश अपने साथी कैलाश चंद्रवंशी के साथ मौके पर पहुंचा तो वहां सतीश कुमार मिला. सतीश के साथ में उसका दोस्त भी था. फिर पैसों की बात हुई तो सतीश ने दिनेश को काले रंग के बैग में रकम दी. नोटों की जांच करने पर वे संदिग्ध पाए गए. बैग में 500-500 रुपये के कुल 4.50 लाख रुपये के नकली नोट मिले. शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की.
पुलिस के अनुसार, सतीश कुमार से पूछताछ में रामप्रसाद उर्फ रमऊ और घुरवा राम के साथ मिलकर नकली नोट तैयार करने और उन्हें खपाने की जानकारी सामने आई. इसके बाद पुलिस टीम ने दोनों आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया.
