श्री शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज भिलाई परिसर में श्रीमद् भागवत कथा






श्री शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज, भिलाई परिसर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के षष्ठम दिवस कथा व्यास डॉ. श्याम सुंदर पाराशर महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की ब्रज लीलाओं, महारास, गुरु-शिष्य परंपरा तथा जीवन में उत्तरदायित्व के महत्व पर प्रवचन दिया।
महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने इन्द्र और ब्रह्माजी दोनों के अहंकार का निवारण किया। इन्द्र ने अपनी भूल स्वीकार कर क्षमा मांगी, जबकि ब्रह्माजी के प्रसंग के माध्यम से यह संदेश मिलता है कि उच्च पद पर आसीन व्यक्ति से अपेक्षाएं भी अधिक होती हैं और उसे अपने उत्तरदायित्वों का सदैव स्मरण रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान की चीरहरण एवं महारास जैसी लीलाओं को सांसारिक दृष्टि से नहीं, बल्कि
आध्यात्मिक भाव से समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्रजभूमि आज भी भक्ति, प्रेम और राधा-कृष्ण की अनन्य आराधना का केंद्र है। वहीं महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कंस वध, माता देवकी एवं वासुदेव को कारागार से मुक्त कराने तथा उज्जैन स्थित महर्षि सांदीपनि के गुरुकुल
में शिक्षा ग्रहण करने का मार्मिक वर्णन किया। कथा के विश्राम प्रसंग में भगवान श्रीकृष्ण एवं रुक्मिणी जी के दिव्य विवाह का मनोहारी आयोजन किया गया। श्रद्धालु इस दिव्य उत्सव में भावविभोर हो उठे। महाआरती एवं प्रसाद वितरण के साथ कथा का समापन हुआ।
