दुर्लभ भंवर गणेश जी की काले ग्रेनाइट मूर्ति चोरी

बिलासपुर में ऐतिहासिक और दुर्लभ भंवर गणेश जी की काले ग्रेनाइट मूर्ति को एक बार फिर चोरों ने निशाना बनाया। गुरुवार रात मंदिर के सेवादार की कनपटी पर कट्‌टा अड़ाकर चोरों ने उनके हाथ पैर और मुंह बांध दिए। फिर उनकी पिटाई कर मूर्ति चोरी कर भाग निकले। जानकारी मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं। घटना मस्तूरी थाना क्षेत्र के इटवा पाली की है।

ग्राम इटवा पाली में स्थित मंदिर में 10वीं और 11वीं सदी की प्राचीन भंवर गणेशजी की ग्रेनाइट की मूर्ति है। मंदिर की देखरेख करने वाला सेवक महेश केंवट गुरुवार रात मंदिर में ही सो रहा था। तभी चार बदमाश मंदिर परिसर में पहुंच गए। इस दौरान उन्होंने महेश की कनपटी पर कट्‌टा अड़ा दिया। उसके हाथ-पैर को बांध दिए और मुंह में टेप चिपका दिए। इस दौरान उसकी पिटाई भी की गई।सालों पुरानी ऐतिहासिक मूर्ति करीब 3 फीट ऊंची और 65 किलो वजनी है। मूर्ति को चोरों ने पहले उखाड़ने की कोशिश की। इसके लिए वे औजार लेकर भी पहुंचे थे, लेकिन मूर्ति को उखाड़ नहीं पाए। इसलिए उसे औजार से अटास कर तोड़कर ले गए हैं। ग्रामीण सुबह जब मंदिर पहुंचे, तब सेवक बंधा मिला और गर्भ गृह से मूर्ति गायब थी।

बताया गया कि मूर्ति को दो बार पहले भी साल 2014 और 2017 में चोरी करने का असफल प्रयास किया गया था। मूर्ति प्राचीन है और इसकी कीमत करोड़ों रुपए बताई जा रही है। वर्षों पुराने मंदिर से भंवर गणेश की मूर्ति चोरी होने की घटना से स्थानीय लोगों व ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।चोरी की खबर मिलते ही मस्तूरी पुलिस की टीम के साथ SSP पारुल माथुर मौके पर पहुंच गईं। उन्होंने डॉग स्क्वायड, फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट और एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट टीम को भी बुला लिया। पुलिस की टीम चोरों की जानकारी जुटा रही है।पूछताछ में पुलिस अफसरों को मंदिर की देखरेख करने वाले सेवादार महेश केंवट की गतिविधियां संदिग्ध मिली हैं। उसने पुलिस को बताया कि छह माह से वह मंदिर की देखरेख कर रहा है। लेकिन, रात में मंदिर में दो बार ही सोया है। ऐसे में पुलिस को चोरी की वारदात में उसके शामिल होने का संदेह है।तीसरी बार हुई चोरी की वारदात, फिर भी सुरक्षा का इंतजाम नहीं

इटवा पाली स्थित भंवर गणेश मंदिर और ग्रेनाइट की दुर्लभ मूर्ति मल्हार स्थित डिड़िनेश्वरी देवी की समकालीन है। सातवीं से दसवीं सदी के मध्य के विकसित मल्हार की मूर्तिकलाओं में भंवर गणेश को भी प्रमुख माना जाता है। मल्हार में बौद्ध स्मारकों तथा प्रतिमाओं का निर्माण इस काल की विशेषता माना जाता है। मल्हार और आसपास में कई प्राचीन मंदिरों के अवशेष मिलते हैं और यह एक महत्वपूर्ण पुरातत्व स्थल है।

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