





यह है पूरा मामला
कहा कि उनकी चिकित्सक बेटी आपराधिक गतिविधियों में लिप्त है। उसके खिलाफ मुकदमा लिखा जा रहा है। उसके साथ ही कई और युवक-युवतियां भी शामिल हैं। उसने बेटी को बचाने के लिए रुपये की मांग की।
उन्होंने चिकित्सक को एक कमरे में बंद रहने और फोन काल के बारे में किसी को न बताने के लिए कहा। डॉ. पीआर गुप्ता साइबर ठगों की बातों से बुरी तरह से भयभीत रहे। उनके कहने पर रुपयों को साइबर ठगों के बताए बैंक खाते में ट्रांसफर करने के लिए लंका स्थित एचडीएफसी बैंक पहुंचे।
बैंक कर्मियों को हुआ शक
बराए हुए चिकित्सक ने बैंककर्मी से अपना फिक्स डिपोजिट तोड़कर रुपये बैंक खाते में डालने को कहा। बैंककर्मी ने बड़ी रकम का फिक्स डिपाजिट तोड़ने का कारण पूछा तो वह नाराज हो गए।
इसकी जानकारी बैंक मैनेजर को हुई तो उन्होंने भी चिकित्सक से बात की, लेकिन उन्होंने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। इस पर बैंक कर्मियों को संदेह हुआ और इसकी सूचना लंका थाना प्रभारी को दी।
पुलिस से भी बचते रहे चिकित्सक
लंका थाना प्रभारी ने बैंक में डॉ. पीआर गुप्ता से बात की तब भी वह कुछ बताने को तैयार न हुए। बार-बार अपने रुपयों की मांग करते रहे। उन्हें थाने लाकर समझाया गया तो उनका डर खत्म हुआ। उन्होंने अपने साथ हुई घटना की जानकारी दी।
बताया कि पुलिस अधिकारी बनकर बात करने वाले फोन से लगातार उनकी गतिविधियों की जानकारी ले रहे हैं। इस पर लंका थाना प्रभारी ने साइबर ठगों के नंबर पर बात की जिसके बाद से वह नंबर बंद हो गए। जिन नंबरों से चिकित्सक को फोन आ रहा थे वह आंध्र प्रदेश के हैं।