



हरमीत सिंह खनूजा और उनके करीबियों के यहां ईडी ने कार्रवाई की है। हरमीत सिंह खनूजा के पत्नी तहसीलदार है। भूमि अधिग्रहण घोटाले का मास्टर माइंड है।

भारतमाला प्रोजेक्ट से जुड़े बहुचर्चित भूमि मुआवजा घोटाले में ईडी ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने रायपुर और महासमुंद जिले के 9 ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई हरमीत सिंह खनूजा और उनके करीबियों के यहां की गई है। हरमीत सिंह खनूजा प्रमुख आरोपियों में से एक माना जा रहा है। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में हरमीत खनूजा को भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले का मुख्य किरदार माना जा रहा है।
रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर के तहत हुए भूमि अधिग्रहण से जुड़े मुआवजा भुगतान घोटाले में एजेंट के रूप में सक्रिय था। जांच एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार, किसानों और जमीन मालिकों से संपर्क कर उन्हें सरकारी मुआवजे से अधिक रकम दिलाने का झांसा दिया और बाद में फर्जी दस्तावेजों के जरिए करोड़ों रुपये का मुआवजा हासिल कराया।
EOW की जांच में सामने आया कि हरमीत खनूजा ने कागजों में फर्जी बंटवारे दिखाए हैं और भूमि रिकॉर्ड में बदलाव करावाए। वास्तविक जमीन मालिकों की जगह दूसरे नामों से मुआवजा क्लेम कराया और प्राप्त राशि को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कराया है। इस पूरी प्रक्रिया से सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
हरमीत खनूजा की पहचान तब और चर्चा में आई जब जांच में यह खुलासा हुआ कि वे तहसीलदार मनप्रीत कौर के पति हैं। इसी कारण मामले में प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में भी हलचल मच गई।
EOW ने दशमेश इंस्टा वेंचर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से कई अहम दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए थे। जांच में सामने आया कि इस कंपनी के डायरेक्टर हरमीत सिंह खनूजा और भावना कुर्रे हैं। भावना कुर्रे, SDM शशिकांत कुर्रे की पत्नी हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि इसी कंपनी के जरिए जमीन सौदे और मुआवजा राशि का लेन-देन किया गया।
आर्थिक अपराध शाखा ने 25 अप्रैल 2025 को हरमीत सिंह खनूजा के खिलाफ छापेमारी कर उन्हें गिरफ्तार किया था। हालांकि बाद में उन्हें कोर्ट से जमानत मिल गई। EOW की कार्रवाई के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू कर दी है। ED ने हरमीत खनूजा के रायपुर स्थित निवास और उनके ससुर के महासमुंद स्थित घर पर छापेमारी की है। माना जा रहा है कि मुआवजा घोटाले से जुड़े पैसों की लेयरिंग और ट्रेल की जांच की जा रही है।
इस पूरे मामले की जांच में यह सामने आया कि जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में 43 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। जमीन के टुकड़ों को बांटकर और रिकॉर्ड में हेराफेरी करके, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) को कुल 78 करोड़ रुपए का गलत भुगतान दिखाया गया।
