मुस्लिमों में क्या होता है मुताह? इसमें एक-दो नहीं 20-25 बार भी घर बसा लेती है लड़की

दुनिया के अलग-अलग धर्म में शादी के अलग-अलग मायने होते हैं. वहीं अगर इस्लाम धर्म की बात की जाए तो शादी एक सामाजिक समझौता होती है. जिसमें पति और पत्नी के परिवार मिलकर एक समझौता करते हैं. पति और उसके परिवार वाले पत्नी के परिवार वालों को मेहर के तौर पर कुछ पैसे देते हैं. इसके बाद लड़का-लड़की जब अपनी सहमति जताते हैं. तो शादी पूरी होती है.

इस्लाम में दो प्रमुख संप्रदाय हैं शिया और सुन्नी जिनकी अलग-अलग मान्यताएं और परंपराएं होती हैं. जिनमें शादी की परंपराएं भी शामिल हैय इस्लाम धर्म में बात की जाए तो शादी की एक नहीं बल्कि कई परंपराएं हैं. इनमें एक है मुताह परंपरा. जिसमें लड़कियां जितनी मर्जी चाहे शादी कर सकती हैं. क्या होती है यह परंपरा,चलिए आपको बताते हैं.

क्या होता है मुताह?

मुताह की बात की जाए तो यह इस्लाम धर्म में मुसलमानों के बीच होने वाली एक अस्थाई शादी है. मुताह अरबी शब्द है जिसका मतलब होता है आनंद या मजा. दो ऐसे लोग जो लंबे समय तक एक दूसरे के साथ नहीं रहना चाहते. वह लोग मुताह विवाह करते हैं. इस्लाम धर्म में मुताह विवाह सिर्फ शिया मुसलमान में किया जाता है. खास तौर पर दुबई, अबू धाबी जैसी अब जगह में बहुत से शिया संप्रदाय के मुसलमान रहते हैं. अपने कारोबार के चलते इन्हें दूर की यात्राएं करनी पड़ती थी और यह किसी जगह ज्यादा देर तक नहीं रुकते थे.

जिस वजह से अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए यह मुताह विवाह कर लेते थे. मुताह विवाह एक टाइम लिमिट के साथ होता है. यानी एक अवधि के बाद दोनों पति पत्नी सहमति के साथ एक दूसरे से अलग हो जाते हैं. हालांकि पति को तलाक के बदले पत्नी को मेहर देना होता है. जो कि सामान्य मुस्लिम शादियों में दिया जाता है. शिया संप्रदाय की ओर से इस विवाह को मुस्लिम पर्सनल लॉ में मान्यता दी गई है.

लड़कियां कर सकती हैं 20-25 शादी

मुताह विवाह में किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं होती. यह एक तरह से कॉन्ट्रैक्ट शादी होती है. लड़कियां जितनी मर्जी चाहे उतनी शादियां कर सकती हैंय इसमें एक अवधि फिक्स होती है. वह चाहे एक महीने की हो, चाहे एक साल की उस अवधि के बाद तलाक हो जाता है. और फिर से किसी और से शादी की जा सकती है. बता दें शिया समुदाय में तो इस विवाह को मान्यता मिली हुई है. लेकिन वही सुन्नी संप्रदाय में इसे अवैध माना जाता है.

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