सेंट थॉमस कॉलेज, भिलाई में “मानसिक स्वास्थ्य एवं सांस्कृतिक उपचार” पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित

सेंट थॉमस कॉलेज, भिलाई में “मानसिक स्वास्थ्य एवं सांस्कृतिक उपचार” पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित

सेंट थॉमस कॉलेज, भिलाई के शिक्षा, मनोविज्ञान एवं अंग्रेजी के स्नातकोत्तर विभाग द्वारा “Beyond Neurocentric Paradigms: Cultural Crisis, Healing and Indigenous Pathway to Well-Being” विषय पर एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया।

इस सम्मेलन के मुख्य वक्ता डॉ. साजी वर्गीस (सहायक प्राध्यापक, दर्शनशास्त्र विभाग, नॉर्थ-ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी, शिलांग) थे। अन्य प्रमुख वक्ताओं में प्रो. जॉन जियोर्डानो (असम्पशन यूनिवर्सिटी, थाईलैंड) एवं डॉ. लेस्ली गॉवलैंड (इटली, एक्जीक्यूटिव कोच एवं कॉर्पोरेट ट्रेनर) शामिल थे।

कार्यक्रम का शुभारंभ संयोजक डॉ. दीप्ति संतोष के स्वागत भाषण से हुआ। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. शाइनी मेंडोन्सा ने अपने उद्बोधन में मानसिक स्वास्थ्य को केवल जैविक एवं न्यूरोलॉजिकल दृष्टिकोण से देखने के बजाय संस्कृति, समुदाय, परंपरा और आध्यात्मिकता के गहरे प्रभाव को समझने पर बल दिया।

महाविद्यालय के प्रशासक फादर डॉ. पी. एस. वर्गीस ने अध्यक्षीय एवं उद्घाटन भाषण देते हुए कहा कि व्यक्ति की पहचान केवल मस्तिष्कीय संरचनाओं से नहीं, बल्कि उसकी परंपराओं, भाषा, संबंधों एवं जीवनानुभवों से भी निर्मित होती है।

डीन एकेडमिक्स डॉ. देबजानी मुखर्जी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

मुख्य वक्ता डॉ. साजी वर्गीस ने अपने व्याख्यान में न्यूरोसेंट्रिक दृष्टिकोण से हटकर सांस्कृतिक दृष्टिकोण की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि भावनाएं सामाजिक रूप से निर्मित होती हैं तथा मानसिक स्वास्थ्य को सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पारिस्थितिक संदर्भों में समझना आवश्यक है।

प्रो. जॉन जियोर्डानो ने “द लैंग्वेज ऑफ बर्ड्स एंड द फ्लाइट ऑफ आइडियाज” विषय पर व्याख्यान देते हुए नागा मिथक, चार्ल्स डार्विन के विकासवाद सिद्धांत एवं आध्यात्मिकता के बीच संबंध स्थापित किया। वहीं, डॉ. लेस्ली गॉवलैंड ने डिजिटल पहचान, सुरक्षा एवं आधुनिक जीवन की अस्थिरता पर अपने विचार प्रस्तुत किए तथा सिगमंड फ्रायड के सिद्धांतों के माध्यम से समकालीन मनोवैज्ञानिक स्थितियों का विश्लेषण किया।

कार्यक्रम में दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। प्रथम सत्र में नॉर्थ-ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी, शिलांग के शोधार्थियों ने ऑनलाइन प्रस्तुति दी, जबकि द्वितीय सत्र में राज्य के भीतर से ऑनलाइन एवं ऑफलाइन प्रतिभागियों ने भाग लिया। सेंट थॉमस कॉलेज एवं अन्य संस्थानों के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने सक्रिय रूप से अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए और चर्चा में भाग लिया।

सम्मेलन का समापन डॉ. निमी वर्गीस द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट एवं विचारों के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन एवं अंतिम धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुजाता कोले द्वारा किया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Previous post भारत ने स्थिति को अच्छे से संभाला, लेकिन विपक्ष अराजकता फैलाने में लगा है’, पश्चिम एशिया के हालात पर बोले पीएम मोदी।