ईरान युद्ध में मात खाया अमेरिका, तो गहरी हुई भारत-रूस की दोस्ती, पीएम मोदी के स्वागत को तैयार है मॉस्को।

ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से कुछ चीजें ऐसी भी हुई हैं, जो कहीं न कहीं भारत के लिए फायदेमंद रहीं. इनमें से एक ये है कि होर्मुज पर जहाजों के फंसने की वजह से भारत ने फिर रूसी तेल खरीदना शुरू कर दिया. इससे दोनों देशों के बीच रिश्ते गहरे हो रहे हैं. अमेरिका कितना भी चाह ले रूस-भारत की मित्रता आगे ही बढ़ती जा रही है.

भारत-रूस के बीच रिश्तों को लेकर अटकलें तब लगने लगी थी, जब भारत ने रूस से तेल की खरीद कम कर दी थी. हालांकि तब भी रूस यही कहता रहा था कि भारत अपनी नीतियों को लेकर स्वतंत्र है और जिससे चाहे, उससे तेल लेगा. एक बार फिर से रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने दोहराया है कि रूस, भारत के तेल बाजार पर अमेरिका के दबाव को बिल्कुल नहीं मानता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करता है और किसी भी बाहरी दबाव में नहीं आता.

IANS को दिए इंटरव्यू में अलीपोव ने कहा कि अमेरिका द्वारा भारत के बाजार में रूस के लिए रुकावटें पैदा करने की कोशिश अंतरराष्ट्रीय संबंधों और व्यापार के सही तरीके नहीं हैं. उन्होंने कहा कि वे अमेरिका-भारत व्यापार पर टिप्पणी नहीं करेंगे, लेकिन किसी भी तरह के दबाव को गलत मानते हैं. भारत भी इस तरह के किसी भी दबाव को नहीं मानता है और उसके रूस के साथ रिश्ते हर परिस्थिति में बढ़े ही हैं. आज भी वो रूस से तेल तो ले ही रहा है, दोनों देशों ने कई और मामलों में करार किया है.

अलीपोव ने कहा- ‘हम देख रहे हैं कि अमेरिका भारत के बाजार में रूस के खिलाफ बाधाएं खड़ी करने की कोशिश कर रहा है. यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों को संभालने और व्यापार करने का सही तरीका नहीं है. हम इस दबाव को खारिज करते हैं और भारत के ऐसे दबाव को न मानने का स्वागत करते हैं.’ उन्होंने भारत के अपने रुख पर अड़े रहने की तारीफ करते हुए आगे यह भी बताया कि रूस और भारत के बीच संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं, खासकर ऊर्जा क्षेत्र में. उन्होंने कहा कि हाल के समय में भारत ने रूस से रूसी तेल आयात काफी बढ़ाया है और दोनों देश आर्थिक सहयोग को और आगे बढ़ा रहे हैं.

रूसी राजदूत ने कहा कि हम व्यापार कर रहे हैं और आर्थिक संबंधों का विस्तार कर रहे हैं. हाल में भारत को रूसी तेल की आपूर्ति में काफी बढ़ोतरी हुई है और हम इसे दोनों देशों के हित में आगे भी बढ़ाना चाहते हैं. उन्होंने पश्चि एशिया की मौजूदा स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां के घटनाक्रम के कारण ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है और अमेरिका की नीतियों से भी इसमें उतार-चढ़ाव आया है. इसके बावजूद रूस और भारत के बीच व्यापार और तेल सहयोग मजबूत दिशा में आगे बढ़ रहा है. जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित रूस दौरे की बात हुई तो अलीपोव ने कहा कि मॉस्को इस साल उनके दौरे का दिल से स्वागत करेगा. उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच हर साल शिखर वार्ता की परंपरा है और पिछले साल दिसंबर में व्लादिमीर पुतिन, भारत आए थे और इस बार पीएम मोदी रूस पहुंचेंगे.

 

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