सेंट थॉमस कॉलेज, भिलाई में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन

सेंट थॉमस कॉलेज, भिलाई में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन

सेंट थॉमस कॉलेज, भिलाई द्वारा 18 मार्च 2026 को अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का विषय था — “परंपराओं से नवाचार तक: छत्तीसगढ़ के संसाधनों के सतत विकास में भारतीय ज्ञान प्रणाली की भूमिका।”

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग के कुलपति प्रो. (डॉ.) संजय तिवारी थे उन्होंने अपने उद्बोधन में शोध, नवाचार तथा पारंपरिक ज्ञान प्रणाली को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जोड़ने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने सतत विकास के व्यावहारिक एवं जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किए, जो कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण बने।

विशिष्ट अतिथि के रूप में भिलाई स्टील प्लांट के सीजीएम श्री विशाल शुक्ला एवं जीएम श्रीमती राधिका श्रीनिवासन ने उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए युवा शोधार्थियों को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम का स्वागत भाषण संयोजक डॉ. चंदा वर्मा द्वारा प्रस्तुत किया गया। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. शाइनी मेंडोंस ने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक विकास और आर्थिक विरासत के संरक्षण के माध्यम से भारत के विकास में उसके योगदान पर प्रकाश डाला। अध्यक्षीय उद्बोधन में महाविद्यालय के प्रशासक डॉ. पी. एस. वर्गीस ने वर्तमान समाज की आवश्यकताओं एवं आधुनिक शिक्षा के मानकों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया तथा विद्यार्थियों को उपनिषदों और वेदों में निहित प्राचीन ज्ञान को समझने के लिए प्रेरित किया।

प्रथम सत्र में सऊदी अरब के प्रिंस सत्ताम बिन अब्दुलअज़ीज़ विश्वविद्यालय के प्रो. डॉ. रेनी जॉर्ज ने मुख्य वक्तव्य दिया। उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य में उभरती प्रवृत्तियों, भविष्य की संभावनाओं तथा रोजगार एवं उद्यमिता के अवसरों पर प्रकाश डाला।

द्वितीय सत्र में केरल के क्रिश्चियन कॉलेज, चेंगन्नूर के सहायक प्राध्यापक डॉ. अभिलाष ने औषधीय जड़ी-बूटियों के वैज्ञानिक प्रमाणीकरण एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों को बढ़ावा देने पर अपने विचार साझा किए।

समापन सत्र की अध्यक्षता भिलाई इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दुर्ग के एप्लाइड केमिस्ट्री के प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार सार ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान हेतु पारंपरिक पद्धतियाँ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, जिन्हें आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर सतत विकास के नए मॉडल विकसित किए जा सकते हैं।

कार्यक्रम में उपप्राचार्य डॉ. जेम्स मैथ्यू, अधिष्ठाता डॉ. देबजानी मुखर्जी सहित महाविद्यालय के समस्त स्टाफ उपस्थित रहे। कोषाध्यक्ष रेवरेंट फादर थॉमस रेवरेंट फादरा रेजी सी. वर्गीस, प्रशासक डॉ. पी. एस. वर्गीस ने आयोजन समिति को इस सफल आयोजन के लिए बधाई दी।

कार्यक्रम का संचालन रिया दत्ता शर्मा (सहायक प्राध्यापक, रसायन शास्त्र विभाग) एवं डॉ नीतू राज {सहायक प्राध्यापक प्राणी शास्त्र विभाग) द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन गणित एवं कंप्यूटर विज्ञान विभाग की प्रमुख डॉ. सुजा वर्गीस द्वारा प्रस्तुत किया गया।

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