



NCERT की पाठ्यपुस्तकों में न्यायपालिका और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े कथित विवादित कंटेंट को लेकर चल रहे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को अहम निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने केंद्र से कहा है कि वह एक सप्ताह के भीतर डोमेन एक्सपर्ट्स की एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित करे, जो इस पूरे मामले की समीक्षा कर रिपोर्ट दे. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह कमेटी निष्पक्ष और विशेषज्ञ दृष्टिकोण से काम करे. अदालत के निर्देश के अनुसार इस समिति में एक पूर्व न्यायाधीश, एक शिक्षाविद (अकादमिक) और कानून के एक प्रतिष्ठित प्रैक्टिशनर को शामिल किया जाएगा. इसके अलावा लीगल स्टडीज़ से जुड़े विषयों की तैयारी में भोपाल स्थित नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी (NJA) को भी विश्वास में लेने को कहा गया है, ताकि पाठ्य सामग्री की शैक्षणिक और कानूनी दृष्टि से समुचित समीक्षा हो सके. CJI जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिम्मेदारों को बख्शा नहीं जाएगा और इसकी जड़ तक पहुंचा जाएगा.


सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि यदि न्यायपालिका सहित किसी भी संस्थान में कमियां हैं और उन्हें इंगित किया जाता है, तो इससे भविष्य में जजों, वकीलों और छात्रों को सीखने में मदद मिलती है. उन्होंने कहा कि ऐसी आलोचनाएं या टिप्पणियां सुधार की दिशा में सहायक हो सकती हैं और इससे मौजूदा हितधारकों को आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने का अवसर मिलता है. हालांकि, अदालत ने इस मामले में सामने आई परिस्थितियों को गंभीर मानते हुए कड़ा रुख भी अपनाया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह सीधे समस्या की जड़ पकड़ने में विश्वास रखता है और किसी भी प्रकार की गैर-जिम्मेदारी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह उन सभी प्लेटफॉर्म्स और माध्यमों की पहचान करे, जिन्होंने इस मुद्दे को लेकर गैर-जिम्मेदाराना तरीके से सामग्री प्रसारित की या भ्रम की स्थिति पैदा की.
CJI जस्टिस सूर्यकांत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर कोई भी व्यक्ति या संस्था इस मामले में अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा. अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी. कोर्ट ने यह भी कहा कि जिम्मेदार लोगों की पहचान कर रिपोर्ट अदालत के सामने पेश की जाए. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस पूरे मामले में जल्द से जल्द विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है. अदालत ने संकेत दिया कि पाठ्यपुस्तकों में शामिल सामग्री, उसकी प्रस्तुति और उससे जुड़े तथ्यों की गंभीरता से जांच आवश्यक है, ताकि छात्रों तक सही और संतुलित जानकारी पहुंचे
इस मामले में कोर्ट की सख्ती को शिक्षा व्यवस्था और न्यायपालिका से जुड़े विषयों की संवेदनशीलता के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद NCERT की पाठ्यपुस्तकों की सामग्री की व्यापक समीक्षा हो सकती है और भविष्य में शैक्षणिक सामग्री तैयार करने की प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और विशेषज्ञता सुनिश्चित की जा सकती है. दूसरी तरफ, NCERT ओर से इस पूरे प्रकरण में माफी मांगी गई है.
