



देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कश्मीर यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में छात्रों को बड़ी सलाह दी। उन्होंने अब तक अपने अनुभवों के साथ एक भारत और श्रेष्ठ भारत के पीएम मोदी के मंत्र का भी जिक्र किया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र में दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना अपनी भावनाओं का सम्मान करना।


उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने गुरुवार को कश्मीर यूनिवर्सिटी के 21वें कॉन्वोकेशन को संबोधित किया। इस मौके पर उन्होंने छात्रों को एकता और अपनेपन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह ना मेरा कश्मीर है, ना तुम्हारा कश्मीर है। यह हम सबका कश्मीर है। उपराष्ट्रपति ने झारखंड के राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए बताया कि ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पहल के तहत जम्मू-कश्मीर से एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य का दौरा किया था और उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र में दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना अपनी भावनाओं का सम्मान करना, और इस तरह के आदान-प्रदान से राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है। उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि देश को ग्लोबल बनने के लिए कॉलोनियल सोच को छोड़ना होगा।
कश्मीर यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन स्नातक छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को भले ही बुनियादी ढांचे और अकादमिक उत्कृष्टता के लिए जाना जाता हो, लेकिन उनकी सच्ची विरासत उनके स्नातकों के चरित्र और योगदान में झलकती है। उन्होंने 1948 में स्थापित कश्मीर विश्वविद्यालय की गौरवशाली विरासत और बढ़ते अकादमिक प्रभाव की सराहना की। उन्होंने विश्वविद्यालय रैंकिंग का जिक्र करते हुए तारीफ की। सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि तीन महत्वपूर्ण बातों पर विशेष प्रसन्नता व्यक्त की है जिनमें उच्च शिक्षा मंत्री का महिला होना, विश्वविद्यालय की कुलपति का महिला होना और स्वर्ण पदक प्राप्त करने वालों में अधिकतर महिलाएं शामिल हैं। उन्होंने इसे जम्मू-कश्मीर में महिला सशक्तिकरण और प्रगति का सशक्त प्रमाण बताया।
