सरकार को लगा रहे थे करोड़ों का ‘चूना’! 3 साल से रायल्टी डकारने वाली

जिले में खनिज संसाधनों के संचालन को लेकर लंबे समय से मिल रही शिकायतों के बीच खनिज विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। शहर से लगे क्षेत्रों में चल रहीं छह चूना-पत्थर खदानों को बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जांच में सामने आया कि इन खदानों से पिछले तीन से चार वर्षों से विभाग को नियमित रायल्टी प्राप्त नहीं हो रही थी, जिससे शासन को करीब एक करोड़ रुपए तक का राजस्व नुकसान का अनुमान है।

छह में से पांच खदानें निजी जमीन पर स्वीकृत थीं, जबकि एक खदान शासकीय भूमि पर थी। सरकारी जमीन वाली खदान को निरस्त कर नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार कई खदानों को विधिवत स्वीकृति मिलने के बावजूद उनका संचालन नियमित रूप से नहीं किया जा रहा था।

 

विभाग ने खदान संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए थे, लेकिन अधिकांश मामलों में संतोषजनक जवाब नहीं मिला। पूर्व में नोटिस के बाद कार्रवाई नहीं होने की स्थिति के चलते संचालकों ने भी गंभीरता नहीं दिखाई, लेकिन इस बार विभाग ने सीधे निरस्तीकरण और बंदी का निर्णय लिया है।

एक ओर स्वीकृत खदानों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है, वहीं जिले में अवैध खनिज भंडारण और उत्खनन के मामलों में कार्रवाई अब तक लंबित है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार 12 अवैध भंडारण और 10 अवैध उत्खनन के प्रकरण चिन्हित किए जा चुके हैं, जिन पर नियमानुसार भारी जुर्माना लगाया जाना है।

जिले में रेत खनन व्यवस्था भी पूरी तरह पटरी पर नहीं आ सकी है। वर्तमान में 20 रेत खदानों को स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन इनमें से केवल आठ खदानों को ही आवश्यक एनओसी प्राप्त हो पाई है। शेष खदानें पर्यावरणीय अनुमति के अभाव में शुरू नहीं हो सकी हैं।

 

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