स्ट्रेचर पर लेटकर लिखा फिजिक्स का पेपर, बीमारी भी नहीं तोड़ पाई चंडीगढ़ की कनिष्का बिष्ट का हौसला।

चंडीगढ़ की 17 वर्षीय छात्रा कनिष्का बिष्ट कहानी दम्य साहस, आत्मविश्वास और सपनों के प्रति अटूट समर्पण की मिसाल है। 13 दिन वेंटिलेटर पर रहने के बाद ऑक्सीजन सिलेंडर के सहारे स्ट्रेचर पर 12वीं बोर्ड परीक्षा दी। गंभीर बीमारी से जूझ रही कनिष्का की हिम्मत सबके लिए प्रेरणा बन गई है।

पंजाब और हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ की 17 वर्षीय छात्रा कनिष्का बिष्ट ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे परिस्थितियां भी झुक जाती हैं। कनिष्का 13 दिनों तक आईसीयू में वेंटिलेटर पर रहने के बाद, ऑक्सीजन सिलेंडर के सहारे स्ट्रेचर पर 12वीं की बोर्ड की परीक्षा देने पहुंची। उसके साथ न तो कोई लेखक (राइटर) और न ही कोई विशेष सहारा था। साथ था तो बस सिर्फ उसका साहस और आत्मविश्वास। बता दें कि सेक्टर 26 स्थित श्री गुरु गोबिंद सिंह खालसा सीनियर सकेंडरी स्कूल की छात्रा कनिष्का जन्म से ही मस्कुलर डिस्ट्रॉफी जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही है। यह एक डिजेनेरेटिव बीमारी है, जो समय के साथ मांसपेशियों को कमजोर करती जाती है।

कनिष्का के पिता प्रेम सिंह बिष्ट जीरकपुर के एक बिजनेसमैन है। वो बताते हैं कि 30 जनवरी को कनिष्का को साधारण खांसी-जुकाम हुआ था। शुरुआत में यह सामान्य बीमारी लगी, लेकिन 2 फरवरी को हालत बिगड़ने पर उसे पंचकूला के अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्थिति और गंभीर होने पर उसे सेक्टर 32 स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों ने उसे आईसीयू में भर्ती कर वेंटिलेटर पर रखा। लगभग 13 दिनों तक मशीनें उसकी सांसें संभालती रहीं। पिता के अनुसार, करीब 10 दिनों तक उसे पूरी तरह होश भी नहीं था। वेंटिलेटर हटने के बाद भी ब्लड प्रेशर की समस्या और अत्यधिक कमजोरी बनी रही।

ऐसे समय में आमतौर पर परिवार का ध्यान सिर्फ स्वास्थ्य सुधार पर होता है, लेकिन कनिष्का के मन में एक और तारीख लगातार दस्तक दे रही थी। उसके बोर्ड का पहला एग्जाम फिजिक्स का था। परीक्षा से एक दिन पहले उसने अपने माता-पिता से साफ कहा कि वह परीक्षा देना चाहती है। यह सुनकर परिवार हैरान रह गया, लेकिन उसकी दृढ़ इच्छा के आगे सबने साथ देने का निर्णय लिया। जल्दबाजी में स्कूल प्रशासन और परीक्षा केंद्र, मनीमाजरा के सरकारी स्कू, से संपर्क किया गया। उसकी स्थिति को देखते हुए सीबीएसई ने उसे एक घंटे का अतिरिक्त समय देने की अनुमति दी। दरअसल कक्षा 10 में भी स्वास्थ्य कारणों से उसे अतिरिक्त समय मिला था।

हालांकि इस बार लेखक की व्यवस्था नहीं हो सकी, इसलिए कनिष्का ने स्वयं ही उत्तर पुस्तिका लिखने का निर्णय लिया। ऑक्सीजन सिलेंडर के सहारे, स्ट्रेचर पर लेटे-लेटे उसने परीक्षा दी। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए भावुक कर देने वाला था। अब उसके चार और पेपर शेष हैं। एक ओर वह धीरे-धीरे स्वास्थ्य लाभ ले रही है, वहीं दूसरी ओर पढ़ाई भी जारी रखे हुए है। उसका बड़ा भाई और पूरा परिवार हर कदम पर उसके साथ है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Previous post अनपढ़ कुम्हार को 1 करोड़ 25 हजार का GST नोटिस, मिट्टी के बर्तन और खिलौने बनाता है परिवार
Next post छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, स्कूल शिक्षा विभाग ही लेगा प्राइवेट स्कूलों में 5वीं, 8वीं बोर्ड परीक्षा।