नेपाल में छिप नहीं पाएंगे भारतीय अपराधी, दोनों देशों में बड़ा समझौता, FATF से काठमांडू को मिलेगी राहत

नेपाल में छिप नहीं पाएंगे भारतीय अपराधी, दोनों देशों में बड़ा समझौता, FATF से काठमांडू को मिलेगी राहत

भारत और नेपाल के बीच आपराधिक मामलों में कानूनी सहायता मुहैया कराने के लिए समझौता हो गया है। नेपाल में कई भारतीय अपराधी शरण ले लेते हैं। वहीं नेपाल FATF के ग्रे लिस्‍ट में है। उसको अब राहत मिलेगी।

 

भारत के अपराधी अक्‍सर अपराध करने के बाद नेपाल भाग जाते हैं। यही नहीं नेपाल के अंदर पाकिस्‍तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का पूरा नेटवर्क है जो जाली नोटों के कारोबार को बढ़ावा देता है। इससे नेपाल भारत विरोधी तत्‍वों का अड्डा बन गया है। अब कई सालों की बातचीत के बाद नेपाल और भारत के बीच आपराधिक मामलों में आपसी कानूनी सहायता समझौता हो गया है। इसे अब दोनों देश आपराधिक जांच और कानूनी प्रक्रिया के मामले में एक-दूसरे की मदद करेंगे। इस समझौते पर काठमांडू में हस्‍ताक्षर किया गया। नेपाल इस समय फाइनेंशियल एक्‍शन टास्‍क फोर्स (FATF) के ग्रे लिस्‍ट में है और उसे उम्‍मीद है कि इस समझौते के बाद वह इससे निकल सकेगा। नेपाल ने इसी तरह का समझौता एक और पड़ोसी देश चीन के साथ भी किया हुआ है।

नेपाल के विधि, न्याय और संसदीय मामलों के मंत्रालय में आयोजित एक समारोह के दौरान मंगलवार को ‘आपराधिक मामलों में परस्पर कानूनी सहायता पर समझौता’ पर हस्ताक्षर किए गए। मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, ‘यह समझौता दोनों देशों को आपराधिक जांच और कानूनी कार्रवाई में सहयोग करने में सक्षम बनाएगा।’ इसका उद्देश्य आपराधिक मामलों से संबंधित जांच, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रियाओं में सहयोग को मजबूत करना है।

नेपाली कानून मंत्रालय के मुताबिक, ‘इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच आपराधिक मामलों में कानूनी सहायता के आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाना है, जिसमें साक्ष्य संग्रह, सूचना साझाकरण और जांच तथा अदालती कार्यवाही के दौरान सक्षम अधिकारियों के बीच समन्वय शामिल है।’ नेपाल और भारत के बीच साल 2005 में इसी तरह का आपसी कानूनी सहायता और प्रत्‍यर्पण समझौता हुआ था। हालांकि अब आपराधिक मामलों में समझौता हो गया है लेकिन नई प्रत्‍यर्पण संधि को लेकर अभी बातचीत जारी है।

इस कानूनी समझौते का उद्देश्‍य जांच, अभियोजन और न्‍यायिक प्रक्रिया से जुड़े आपराधिक मामले में दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ाया जाएगा। भारत की ओर से नेपाल में राजदूत नवीन श्रीवास्‍तव ने इस समझौते पर हस्‍ताक्षर किया है। काठमांडू पोस्‍ट की रिपोर्ट के मुताबिक इस समझौते के बाद एक तंत्र विकसित किया जाएगा ताकि आपराधिक मामलों की जांच, अभियोजन और न्‍यायिक प्रक्रिया को किया जा सके। इस समझौते की मदद से मानव तस्‍करी, ड्रग्‍स की तस्‍करी, वित्‍तीय अपराध, आतंकवाद से जुड़े अपराध और संगठित अपराध को रोकने में मदद मिलेगी। इसकी मदद से अधिकारी और जांच एजेंसियां इन विषयों की प्रभावी तरीके से जांच कर सकेंगी। भारत और नेपाल के बीच साल 1953 में इससे पहले प्रत्‍यर्पण संधि हुई थी जो अब खत्‍म हो गई है।

 

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