



▪️ JJ Act एवं POCSO Act पर बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों हेतु रेंज स्तरीय कार्यशाला आयोजित



▪️ UNICEF के सहयोग से बाल संरक्षण, चाइल्ड फ्रेंडली पुलिसिंग एवं न्यायिक प्रक्रिया पर विस्तृत प्रशिक्षण
▪️ किशोर न्याय प्रकरणों में समन्वित विवेचना एवं पुनर्वास तंत्र सुदृढ़ करने पर बल
▪️ जिला कलेक्टर एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की उपस्थिति में विभागीय सहभागिता सुनिश्चित
संक्षिप्त विवरण :
दुर्ग जिला पुलिस द्वारा UNICEF के सहयोग से दिनांक 19.02.2026 को प्रातः 10:30 बजे से सीए बिल्डिंग, सिविक सेंटर भिलाई में बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों हेतु रेंज स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पुलिस अधिकारियों एवं विवेचकों को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) तथा किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के विभिन्न प्रावधानों के संबंध में व्यवहारिक एवं विधिसम्मत प्रशिक्षण प्रदान करना रहा।
कार्यक्रम में बाल संरक्षण से जुड़े प्रकरणों में प्राथमिकी पंजीयन, बाल पीड़ितों के बयान की प्रक्रिया, चाइल्ड फ्रेंडली पुलिसिंग के सिद्धांत, किशोर विधि विरुद्ध बालकों के अधिकार, जे.जे. एक्ट के प्रपत्रों का उपयोग, किशोर न्याय बोर्ड एवं बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुतिकरण, चिकित्सीय परीक्षण, परामर्श एवं पुनर्वास प्रक्रिया संबंधी प्रावधानों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया। केस स्टडी के माध्यम से विवेचना में आने वाली व्यवहारिक चुनौतियों एवं उनके समाधान पर भी चर्चा की गई।
कार्यक्रम में जिला कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक की गरिमामयी उपस्थिति रही। जिला कलेक्टर ने अपने संबोधन में कहा कि बच्चे देश के भविष्य हैं तथा उन्हें सुरक्षित वातावरण प्रदान करना और आवश्यकता होने पर समाज की मुख्यधारा में पुनर्स्थापित करना प्रशासन एवं समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जिले की समस्त इकाइयों का संयुक्त प्रशिक्षण होने से आपसी समन्वय एवं सहभागिता में वृद्धि होगी, जिससे किशोर न्याय से संबंधित मामलों की विवेचना एवं न्याय प्रक्रिया और अधिक प्रभावी एवं सुदृढ़ होगी।
पुलिस अधीक्षक ने अपने उद्बोधन में कहा कि बाल संरक्षण से जुड़े प्रत्येक प्रकरण में पुलिस अधिकारियों को संवेदनशीलता, गोपनीयता एवं विधिक प्रावधानों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण विवेचना, समयबद्ध कार्रवाई एवं विभिन्न विभागों के साथ समन्वय ही पीड़ित बालकों को त्वरित न्याय दिलाने का आधार है। इस प्रकार के प्रशिक्षण से पुलिस अधिकारियों की क्षमता में वृद्धि होगी तथा बाल हित सर्वोपरि रखते हुए कार्यवाही सुनिश्चित की जा सकेगी।
कार्यक्रम में किशोर न्याय बोर्ड, आरपीएफ, जीआरपी, जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल संप्रेक्षण गृह, परिवीक्षा अधिकारी, बाल कल्याण अधिकारी (बालगृह), चाइल्ड हेल्पलाइन, केस वर्कर एवं स्कूल शिक्षा विभाग के प्रतिनिधियों की सहभागिता रही। सभी विभागों के समन्वय से बाल संरक्षण तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में आवश्यक कदमों पर चर्चा की गई।
सराहनीय कार्य :
उक्त कार्यशाला के सफल आयोजन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती ममता देवांगन, नगर पुलिस अधीक्षक डॉ. चित्रा वर्मा, महिला थाना स्टाफ, पुलिस लाइन एवं प्रशिक्षण शाखा के अधिकारी/कर्मचारियों की सक्रिय एवं समन्वित भूमिका रही।
दुर्ग पुलिस की अपील :
दुर्ग पुलिस आम नागरिकों से अपील करती है कि बालकों से संबंधित किसी भी प्रकार के अपराध, शोषण या उत्पीड़न की जानकारी तत्काल पुलिस को दें। बाल सुरक्षा एवं अधिकारों की रक्षा हेतु सभी विभागों एवं समाज का सहयोग आवश्यक है।


