डिजिटल जनगणना पर CM साय सख्त, जवाब देना होगा अनिवार्य, गलत जानकारी देने पर होगी एफआईआर

प्रदेश में एक मई 2026 से शुरू होने वाली डिजिटल जनगणना को लेकर प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जानकारी देने से इन्कार या गलत तथ्य देने पर कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में जुर्माना, सजा या दोनों का प्रविधान लागू रहेगा।

प्रशासन ने सही व पूरी जानकारी देने की अपील की है। इस वार जनगणना पूरी तरह मोवाइल एप आधारित होगी। करीब एक हजार नागरिकों पर एक प्रगणक नियुक्त होंगे, जो घर-घर पहुंचकर जानकारी दर्ज करेंगे। पहले चरण में मकान, दूसरे में परिवार और तीसरे में हर सदस्य का विवरण शामिल किया जाएगा।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति जानकारी छिपाता है. गलत विवरण देता है या सहयोग नहीं करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई संभव है। जनगणना कानून में आर्थिक दंड के साथ कारावास तक का प्रविधान रखा गया है

प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि केवल अधिकृत प्रगणक को ही जानकारी दें। किसी भी संदेह की स्थिति में स्थानीय प्रशासन या हेल्पलाइन से संपर्क करने की सलाह दी गई है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी गोपनीय रहेगी। डेटा सुरक्षित सर्वर में संग्रहित किया जाएगा और केवल अधिकृत अधिकारियों को ही इसकी पहुंच होगी।

जनगणना केवल जनसंख्या की गणना नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। मोबाइल एप और वेव पोर्टल के माध्यम से डेटा संकलन किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी होगी। विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री

 

डिजिटल जनगणना से प्रदेश की वास्तविक जनसंख्या, सामाजिक संचना और विकास योजनाओं के लिए जरूरी आंकडे तेजी से उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे भविष्य की नीतियां अधिक सटीक बनाई जा सकेंगी। डॉ गौरव सिंह कलेक्टर

 

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