



छत्तीसगढ़ RI पेपर लीक कांड: 100 से अधिक अभ्यर्थियों तक पहुंचा था प्रश्नपत्र, EOW ने 3000 पन्नों का चालान किया पेश



राजस्व निरीक्षक विभागीय परीक्षा-2024 के पेपर लीक प्रकरण में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (ईओडब्ल्यू/एसीबी) ने तीन हजार पन्नों का आरोपित विरेन्द्र जाटव और हेमंत कुमार कौशिक (दोनों सहायक सांख्यिकी अधिकारी) के विरुद्ध मंगलवार को चालान पेश किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार यह मामला सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया, जिसमें परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लीक कर आर्थिक लाभ कमाया गया। एजेंसी का दावा है कि 100 से अधिक अभ्यर्थियों तक प्रश्नपत्र को पहुंचाया गया है।
विवेचना में सामने आया है कि सात जनवरी 2024 को आयोजित होने वाली परीक्षा का प्रश्नपत्र आरोपित विरेन्द्र जाटव ने एक वरिष्ठ अधिकारी के आवास पर टाइप किया था। आरोप है कि प्रश्नपत्र तैयार होने के बाद ही उसे गोपनीय रखने के बजाय चुनिंदा अभ्यर्थियों तक पहुंचाने की साजिश रची गई।
जांच में यह तथ्य सामने आया कि अलग-अलग जिलों से आए अभ्यर्थियों को समूह में रायपुर बुलाया गया। आरोपितों ने उन्हें विभिन्न होटलों, फार्म हाउस और रिजार्ट में ठहराया। वहीं पर प्रश्नपत्र पढ़ाकर नोट कराया गया। अभ्यर्थियों को निर्देश दिया गया कि वे प्रश्न पढ़कर याद कर लें और लिखे गए नोट्स को परीक्षा से पहले जला दें, ताकि कोई भौतिक साक्ष्य न बचे। इस पूरी प्रक्रिया में आरोपितों ने अपने रिश्तेदारों को भी शामिल किया, जो अलग-अलग स्थानों पर जाकर प्रश्न नोट कराने में सहयोग करते थे।
डिजिटल साक्ष्य और सीडीआर से राजफाश
प्रकरण में महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। मोबाइल फोन, इलेक्ट्रानिक डिवाइस और अन्य माध्यमों से यह पुष्टि हुई है कि प्रश्नपत्र विभिन्न माध्यमों से अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया। काल डिटेल रिकार्ड (सीडीआर) विश्लेषण में परीक्षा से ठीक एक रात पहले, छह जनवरी 2024 को कई अभ्यर्थियों और आरोपितों की लोकेशन एक ही स्थान पर पाई गई। टावर लोकेशन से यह भी पुष्टि हुई कि आरोपित परीक्षा की पूर्व संध्या पर रातभर अलग-अलग होटलों, फार्म हाउस और रिजार्ट में घूमते रहे और वहीं प्रश्न सामग्री उपलब्ध कराई गई।
जांच में यह भी पाया गया कि जो अभ्यर्थी एक साथ ठहरे थे, उनके परीक्षा परिणामों में उल्लेखनीय समानता थी। उनके अंकों के साथ-साथ उत्तर पुस्तिकाओं में सही और गलत उत्तरों का पैटर्न भी काफी हद तक एक जैसा पाया गया, जिससे समान उत्तर-कुंजी के आधार पर तैयारी के संकेत मिले हैं।
मनी ट्रेल और अन्य संलिप्तों की जांच जारी
एंटी करप्शन ब्यूरो ने बताया कि प्रकरण में वित्तीय लेनदेन (मनी ट्रेल) की भी जांच की जा रही है। साथ ही अन्य संभावित संलिप्त अधिकारियों, राजस्व निरीक्षकों एवं संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी पड़ताल जारी है।
बता दें कि सात जनवरी 2024 में पटवारी से आरआइ बनने के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। 90 पदों के लिए 2600 से ज्यादा पटवारी शामिल हुए थे। 29 फरवरी 2024 को परीक्षा का परिणाम जारी किया गया था। इसमें 216 पटवारियों का चयन प्रशिक्षण के लिए हुआ था। हालांकि बाद में 13 लोगों का अंतिम चयन हुआ। लेकिन बाद में 22 लोगों का सलेक्शन किया गया। इसे लेकर पटवारियों ने आक्रोश जताया था। साथ ही लेन-देन कर अपने लोगों को उपकृत करने का आरोप लगाया। परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायत को लेकर मामला विधानसभा में उठने पर राज्य सरकार द्वारा इसे जांच के लिए ईओडब्ल्यू को सौंपा था। जिसके बाद अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई।