



▪️ नाबालिग पीड़िता के साथ लंबे समय तक दुष्कर्म एवं सामूहिक दुष्कर्म का गंभीर प्रकरण दर्ज हुआ था

▪️ पीड़िता की लिखित रिपोर्ट पर BNS एवं POCSO Act के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया था
▪️ प्रकरण में फरार चल रहे 4 था ,मुख्य आरोपी कृपा शंकर उर्फ राजू कश्यप गिरफ्तार
▪️ प्रकरण में अब तक 4 आरोपी गिरफ्तार हो चुके है शेष आरोपियों की गिरफ्तारी हेतु तलाश सतत जारी
संक्षिप्त विवरण :
दिनांक 30.01.2026 को पीड़िता अपनी माता के साथ महिला थाना दुर्ग उपस्थित होकर लिखित आवेदन प्रस्तुत की। आवेदन के अनुसार अप्रैल 2018 से अक्टूबर 2025 की अवधि के दौरान, पीड़िता के नाबालिग होने की जानकारी होते हुए भी कुल 06 आरोपियों द्वारा पीड़िता के साथ दुष्कर्म एवं सामूहिक दुष्कर्म की घटनाएं कारित की गईं।
प्राप्त रिपोर्ट पर विधिवत अपराध क्रमांक पंजीबद्ध कर धारा 65(1), 70(2) BNS तथा POCSO Act की धारा 6, 12 के अंतर्गत अपराध कायम कर विवेचना में लिया गया है। विवेचना के दौरान पूर्व में 03 आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार किया जा चुका था।
इसी क्रम में फरार चल रहे आरोपी कृपा शंकर उर्फ राजू कश्यप को प्रकरण से संबंधित साक्ष्य पाए जाने पर दिनांक 07.02.2026 को समय 13:25 बजे विधिवत गिरफ्तार किया गया है। आरोपी को अभिरक्षा में लेकर आवश्यक वैधानिक कार्यवाही की जा रही है तथा सक्षम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
प्रकरण में शेष आरोपियों की गिरफ्तारी हेतु संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।
आरोपी का विवरण :
1. विजय स्वाइन, उम्र 37 वर्ष, निवासी दुर्गा नगर पश्चिम, भिलाई (पूर्व से गिरफ्तार)
2. अनिल चौधरी, उम्र 60 वर्ष, निवासी ज़ोन-01, खुर्शीपार (पूर्व से गिरफ्तार)
3. गोविंद सिंह नागवंशी, उम्र 62 वर्ष, निवासी चौकड़िया पारा, वार्ड क्रमांक 35, जिला राजनांदगांव(पूर्व से गिरफ्तार)
4. कृपा शंकर उर्फ राजू कश्यप, उम्र 58 वर्ष, निवासी सेक्टर-05, सड़क-09, मकान नंबर 05-ए, मल पता राम लखनपार, थाना बड़हलगंज, जिला गोरखपुर (उत्तर प्रदेश)
जप्त सामग्री :
▪️ विवेचना के दौरान प्राप्त इलेक्ट्रॉनिक एवं अन्य साक्ष्य (जांचाधीन)
सराहनीय भूमिका :
▪️ उक्त प्रकरण में महिला थाना और accu दुर्ग की विवेचना टीम द्वारा संवेदनशीलता एवं तत्परता के साथ की गई वैधानिक कार्यवाही सराहनीय रही।
दुर्ग पुलिस की अपील :
दुर्ग पुलिस आम नागरिकों से अपील करती है कि ऐसे गंभीर एवं संवेदनशील अपराधों की जानकारी तत्काल पुलिस को दें। पीड़ितों की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाती है तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।



