



DRDO ने हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक में ‘स्क्रैमजेट इंजन’ का 12 मिनट तक सफल परीक्षण किया. यह ध्वनि से 5 गुना तेज यानी 6,100 किमी/घंटा की रफ्तार से चलने में सक्षम है. यह पूरी तरह स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत की बड़ी जीत है. इस सफलता से अब भारत पलक झपकते ही दुश्मन के ठिकानों को तबाह करने वाली अचूक मिसाइलें बनाने में सक्षम हो गया है. अबतक अमेरिका, रूस, चीन के पास ही यह स्वदेशी तकनीक मौजूद है.

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने भारत की सैन्य शक्ति को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाई देते हुए हाइपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रम में एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है. हैदराबाद स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (DRDL) ने आज यानी 09 जनवरी, 2026 को अपने अत्याधुनिक केंद्र में ‘एक्टिवली कूल्ड लॉन्ग ड्यूरेशन स्क्रैमजेट इंजन’ का सफल ग्राउंड परीक्षण संपन्न किया. इस परीक्षण के दौरान इंजन ने 12 मिनट से अधिक का रन टाइम हासिल किया, जो तकनीकी रूप से एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. यह सफल परीक्षण अप्रैल 2025 में किए गए पिछले सबस्केल परीक्षणों का उन्नत चरण है, जिसने अब पूर्ण पैमाने (Full Scale) पर अपनी क्षमता साबित कर दी है. इस तकनीक के सफल होने से भारत अब ऐसी हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो स्पीड की रफ्तार से पांच गुना अधिक यानी 6,100 किमी/घंटा की रफ्तार से उड़ान भर सकेंगी. पूरी तरह स्वदेशी रूप से डिजाइन किए गए इस इंजन ने भारत को दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर दिया है जिनके पास उन्नत एयरोस्पेस क्षमताएं मौजूद हैं.
