डायरेक्‍टर के घर रेड के बाद 3 सूटकेस पैसा लेकर निकली CBI, नोट गिनते-गिनते अधिकारियों को भी आ गए पसीने।

बेंगलुरु में सीबीआई ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए सीपीआरआई के संयुक्त निदेशक राजाराम मोहनराव को गिरफ्तार किया है. अधिकारी ने 9.5 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी, लेकिन छापेमारी में उनके पास से 3.76 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए. जांच एजेंसी को यह भारी नकदी तीन सूटकेस में ठूंसकर रखी हुई मिली. इस मामले में सुधीर ग्रुप के निदेशक अतुल खन्ना को भी दबोचा गया है.

कल्पना कीजिए कि जांच एजेंसी एक छोटे से रिश्वत के मामले की गुत्थी सुलझाने पहुंचती है लेकिन जैसे ही कमरे के कोने में रखे सूटकेस खुलते हैं, वहां नोटों की गड्डियां देखकर अधिकारियों की आंखें फटी रह जाती हैं. बेंगलुरु में भ्रष्टाचार के खिलाफ सीबीआई (CBI) की यह कार्रवाई किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं थी. जहां एक सरकारी अधिकारी के ठिकानों पर जब छापेमारी हुई तो वहां अलमारियों में नहीं बल्कि तीन बड़े सूटकेस में भरकर नकदी रखी हुई थी. भ्रष्टाचार की यह जड़ें कितनी गहरी हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रिश्वत की मांग तो लाखों में थी लेकिन बरामदगी करोड़ों में हुई. सीबीआई की इस कार्रवाई ने सरकारी महकमों में हड़कंप मचा दिया है. बेंगलुरु के केंद्रीय विद्युत अनुसंधान संस्थान (CPRI) में तैनात एक रसूखदार अधिकारी ने शायद कभी सोचा भी नहीं होगा कि जिस काली कमाई को उन्होंने सूटकेस में सहेज कर रखा है, वह एक दिन उनकी गिरफ्तारी का सबसे बड़ा सबूत बन जाएगी. नोटों के बंडलों से पटे ये सूटकेस भ्रष्टाचार के उस गंदे खेल की गवाही दे रहे हैं, जो सिस्टम के भीतर दीमक की तरह फैला हुआ है.

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बेंगलुरु में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया है. इस कार्रवाई की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

· संयुक्त निदेशक गिरफ्तार: सीबीआई ने केंद्रीय विद्युत अनुसंधान संस्थान (CPRI), बेंगलुरु के संयुक्त निदेशक राजाराम मोहनराव चेनु को गिरफ्तार किया है.

 

तीन सूटकेस और करोड़ों की नकदी: सर्च ऑपरेशन के दौरान सीबीआई को अधिकारी के पास से करीब 3 करोड़ 76 लाख रुपये की भारी नकदी बरामद हुई है.

· दूसरा आरोपी: सीबीआई ने अतुल खन्ना (निदेशक, एम/एस सुधीर ग्रुप ऑफ कंपनियाँ) को भी इस मामले में सह-आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया है.

· भ्रष्टाचार पर चोट: यह कार्रवाई दर्शाती है कि कैसे उच्च पदों पर बैठे अधिकारी निजी कंपनियों के साथ मिलकर सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर रहे हैं.

 

 

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