अतिक्रमण की रंजिश में तालिबानी सजा! बागडोंगरी के दो परिवारों का ‘हुक्का-पानी’ बंद, तहसीलदार से न्याय की गुहार।

जिले के ग्राम पंचायत बागडोंगरी में प्रशासन से शिकायत करना दो परिवारों के लिए भारी पड़ गया है। गांव की शीतला समिति और कुछ ग्रामीणों पर इन परिवारों का सामाजिक बहिष्कार (हुक्का-पानी बंद) करने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ितों ने इस संबंध में तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है।

पीड़ित अनिल कुमार उइके और आशाराम साहू के अनुसार, यह पूरा विवाद अवैध कब्जे की शिकायत से शुरू हुआ। उन्होंने ‘सुशासन तिहार’ के दौरान देवगुड़ी की सरकारी भूमि पर दीनानाथ नामक व्यक्ति द्वारा किए गए कब्जे और सीसी रोड पर हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए प्रशासन को आवेदन दिया था। तहसीलदार के आदेश के बाद प्रशासन ने वहां से अतिक्रमण हटवा दिया था, जिससे कुछ ग्रामीण और समिति के सदस्य नाराज थे।

आरोप है कि अतिक्रमण हटने की रंजिश को लेकर 13 दिसंबर को शीतला प्रांगण में एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में शीतला समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश सहित रमेश, गौतम साहू, घनश्याम, विष्णु और अन्य सदस्य मौजूद थे। पीड़ितों का दावा है कि उन पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया गया और पांच-पांच हजार रुपये की दंड राशि जमा करने को कहा गया।

जब दोनों परिवारों ने नाजायज दंड राशि देने से इनकार कर दिया, तो समिति के पदाधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से उनका ‘हुक्का-पानी बंद’ करने और सामाजिक बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया। पीड़ितों का कहना है कि इस फरमान के बाद से उनका पूरा परिवार मानसिक रूप से बेहद प्रताड़ित है। उन्हें डर है कि भविष्य में उनके साथ कोई अप्रिय घटना घटित हो सकती है।

पीड़ित परिवारों ने तहसीलदार को सौंपे ज्ञापन में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि लोकतंत्र में शिकायत करना कोई अपराध नहीं है, इसलिए सामाजिक बहिष्कार करने वालों पर नकेल कसी जाए और उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए।

 

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