



अशोकनगर: जिले में लोकायुक्त की टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। कृषि उपज मंडी में पदस्थ सहायक उपनिरीक्षक को 15 हजार की रिश्वत के साथ रंगे हाथ दबोचा है। उपनिरीक्षक ने नपा के पूर्व अध्यक्ष से लाइसेंस बनाने के नाम पर 15 हजार रुपए की मांग की थी।

जिले के पूर्व नपा अध्यक्ष भूपेंद्र नारायण द्विवेदी ने बताया कि 11 महीने पहले उन्होंने अपनी पत्नी के नाम से मंडी में लाइसेंस के लिए आवेदन दिया था, लेकिन कर्मचारी उन्हें ही परेशान करने लगे। जब सहायक निरीक्षक महेंद्र कनेरिया से इस बारे में बात की तो उन्होंने रिश्वत की मांग की। उन्होंने एक कागज पर रिश्वत का रेट लिखकर पकड़ा दिया। उन्हें डर था कि मुंह से रिश्वत की राशि बोलने पर कहीं मोबाइल में रिकॉर्ड न हो जाए। उन्होंने मामले को निपटाने के लिए 20 हजार रुपए रिश्वत देने की बात कही। उन्होंने मंडी सचिव को फोन लगाया और 15 हजार पर डील तय हुई। द्विवेदी ने बताया कि इस मामले में मंडी सचिव प्रेम कुमार मीणा भी दोषी हैं। उन्हीं के कहने पर पैसे की मांग की गई।
मिस्ड कॉल पर पहुंची लोकायुक्त पुलिस
द्विवेदी ने बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत होली से पहले लोकायुक्त में की थी, जिसके बाद पुलिस के कहने पर सारी फॉर्मेलिटी पूरी की और सबूत जुटाए। लोकायुक्त की टीम ने जाल बिछाया। टीम ने कहा था कि रिश्वत की रकम देने पहुंचना तो मिस्ड कॉल करना। उन्होंने ऐसा ही किया। जैसे ही पैसे दिए तुरंत लोकायुक्त को मिस्ड कॉल किया। जिसके बाद गेट पर किसान बनकर खड़ी लोकायुक्त पुलिस अंदर पहुंची और उप निरीक्षक को दबोच लिया। टीम ने उपनिरीक्षक के पैंट उतरवाकर तलाशी ली।