सौरभ शर्मा की डायरी में 5 माह में 50 करोड़ की वसूली का हिसाब… कहीं TM का मतलब ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर तो नहीं?

ग्वालियर: मध्य प्रदेश में काली कमाई का कुबेर निकला पूर्व परिवहन आरक्षक सौरभ शर्मा ऐसे ही इतना धनवान नहीं हो गया था। उसके ठिकानों पर पड़े छापे से परिवहन विभाग की अंधाधुन वसूली का काला सच भी सामने आ गया है।

परिवहन चेकपोस्ट किस तरह वसूली का अड्डा बने हुए थे, इसे लेकर एक और जानकारी सामने आई है। प्रदेश के सभी चेक पोस्टों से होने वाली काली कमाई का हिसाब-किताब जिस डायरी में रखा जाता था, उसके कुछ पन्ने ‘नईदुनिया’ को मिले हैं।

इनमें वर्ष 2020 और 2021 के कुछ महीनों में प्रदेश के 38 चेकपोस्टों से लेकर फ्लाइंग स्क्वाड से हर माह कितनी राशि वसूली का लक्ष्य, कितने प्राप्त हुए, कितना शेष, यह पूरी टेबल बनी मिली है।

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टीएम मतलब ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर, टीसी यानी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर?

  • डायरी के पन्ने पर ऊपर टीएम और टीसी लिखा हुआ है। टीएम का आशय ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर और टीसी का ट्रांसपोर्ट कमिश्नर माना जा रहा है। हर पेज पर टीसी लिखकर नीचे हस्ताक्षर भी हैं। राशि को लाखों रुपये में लिखा गया है।
  • सबसे ज्यादा वसूली सेंधवा चेकपोस्ट से होने की जानकारी दर्ज है। यही नहीं, इसमें बेगारी की राशि से लेकर जेब से मिलाने वाली राशि तक का उल्लेख किया गया है। बता दें, राज्य सरकार 1 जुलाई, 2024 से चेकपोस्ट बंद कर चुकी है।
  • डायरी के पन्नों में जिन चेकपोस्टों का उल्लेख किया गया है, उनमें किसी पेज पर 35 तो किसी पर 38 चेकपोस्ट के नाम व उनके आगे वसूली राशि लिखी है। हर चेक पोस्ट के आगे राशि, जमा व शेष सहित रिमार्क का कॉलम बना है।
  • पांच माह का हिसाब लगभग 50 करोड़ रुपये का है। एक माह की वसूली 10 करोड़ रुपये लगभग लिखी हुई है। इस हिसाब से अगर सौरभ के कार्यकाल यानी 81 माह का हिसाब निकालें तो यह 800 करोड़ से ज्यादा का बैठता है।

इन चेकपोस्टों के नाम लिखे डायरी में

सेंधवा प्लस उप इंदौर, नयागांव प्लस उप उज्जैन, मुरैना, सिकंदरा, चिरूला, मालथौन, खिलचीपुर, खवासा, शाहपुर फाटा, कैमाहा, हनुमना, चाकघाट, पिटोल, सोंयत, मुलताई, सौंसर, मोतीनाला, रजेगांव, मोरवा, पहाड़ीबंधा, फूफ, जमालपुरा, लेकी चौराहा, रामनगर तिराहा, ग्वालियर, रानीगंज तिगैला।

ऐसे चलते थे चेकपोस्ट नियम

मध्य प्रदेश में पहले 38 चेकपोस्ट थे। वर्ष 2021 के बाद 30 रह गए। इनमें छोटे चेकपोस्ट भी शामिल थे। बड़े चेकपोस्टों पर एक आरटीई, दो सब इंस्पेक्टर, दो हवलदार व सिपाहियों की तैनाती का प्रावधान था। छोटे चेकपोस्ट एसआई संभालते थे।

स्टाफ की कमी के कारण निर्धारित स्टाफ नहीं रहता था। चेकपोस्ट परिवहन विभाग के लिए वसूली का स्रोत ही थे, यहां डमी पोस्टिंग की जाती थी और निजी व्यक्ति पूरा काम संभालते थे। वसूली करने वालों को कटर कहा जाता था। रोजनामचे में आरटीई व स्टाफ की ड्यूटी रहती थी, लेकिन मौके पर ये लोग मौजूद ही नहीं रहते थे।

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