



नई दिल्ली: स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान के तेजी से निर्माण के क्षेत्र में भारत में एक बड़ा रास्ता तय कर लिया गया है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की नासिक यूनिट को सोमवार को तेजस एमके1ए (Tejas MK1A) के लिए फ्लाइट क्लीयरेंस मिल गई है। सोमवार को इस संबंध में जारी किए गए आधिकारिक बयान के अनुसार एचएएल की नासिक यूनिट में बनने वाले लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट को उड़ान की मंजूरी प्राप्त हो गई है। इससे एचएएल को लड़ाकू विमान बनाने की दिशा में एक नई ताकत मिली है और वह अब तेजी से दो जगहों से स्वदेशी हल्के फाइटर जेट का निर्माण कर सकता है। इससे भारतीय वायु सेना की जरूरतें जल्द पूरी होने की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं।

नासिक से तेजस एमके1ए को फ्लाइट क्लीयरेंस
नासिक में बेंगलुरु के बाहर लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट बनाने की एचएएल की तीसरी प्रोडक्शन लाइन है। यहां तेजी से लड़ाकू विमान निर्माण शुरू होने से देश को रक्षा क्षेत्र में अपनी तैयारी बढ़ाने और सामरिक तौर पर आत्मनिर्भर होने के लक्ष्य की ओर बढ़ने में मदद मिलेगी। बेंगलुरु की दोनों प्रोडक्शन लाइन की साल में 8-8 विमान बनाने की क्षमता है और नासिक की भी ही इतनी ही क्षमता होने की वजह से एचएएल को समय पर काम करने के लिए बहुत बड़ी सहायता मिलने वाली है और साल में 24 एलसीए निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। कुछ रिपोर्ट के अनुसार एचएएल नासिक में चौथा प्रोडक्शन लाइन भी तैयार कर सकता है। लेकिन, यह तभी फायदेमंद साबित हो सकता है, जब जीई से इंजन की सप्लाई दुरुस्त हो सके।
वायुसेना डिलिवरी में देरी पर जता चुकी है चिंता
भारतीय वायुसेना के लिए यह बहुत ही बड़ी राहत की बात है। यह इस वक्त फाइटर जेट की बहुत बड़ी किल्लत झेल रही है और इसमें स्वदेशी हल्के फाइटर जेट की डिलिवरी में हो रही देरी से परेशानी और बढ़ी हुई है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद सीआईआई के एक कार्यक्रम में मई महीने में एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह ने यह मुद्दा बहुत ही गंभीरता से उठाया भी था। उन्होंने खास तौर पर तेजस एमके1ए की डिलिवरी में हो रही देरी पर चिंता जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि इनकी डिलिवरी के लिए जो दावे किए जाते हैं, उनकी डेडलाइन को सख्ती से पूरा करने का इरादा होना चाहिए। उन्होंने तेजस एमके2 का प्रोटोटाइप नहीं तैयार होने की भी बात छेड़ी थी।
2027 तक 83 तेजस एमके1ए सप्लाई होनी थी
योजना के अनुसार वायुसेना को हर साल 20 तेजस एमके-1ए विमान मिलने थे और साल 2027 तक कुल 83 हल्के फाइटर जेट (एलसीए) की सप्लाई होनी थी। इनमें से 10 ट्रेनर विमानों की सप्लाई होनी थी। इन विमानों के ज्यादातर उपकरण स्वदेशी हैं। बता दें कि रक्षा मंत्रालय ने साल 2021 में 83 तेजस एमएके 1ए खरीदने के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ 48,000 करोड़ रुपये का सौदा किया था।
जीई कंपनी से इंजन की सप्लाई में हुई काफी देरी
कुछ समय पहले एक रिपोर्ट आई थी कि अगले साल मार्च (2026) तक वायुसेना को 6 हल्के लड़ाकू विमानों (LCA) की डिलिवरी की संभावना है। अभी तक हुई देरी के लिए जीई को ही जिम्मेदार बताया गया है, जिसने इंजन की सप्लाई में काफी देर की है। वैसे जीई एयरोस्पेस की ओर से मौजूदा वित्त वर्ष में 12 इंजन की सप्लाई किए जाने की संभावना है। जैसे-जैसे इंजन की सप्लाई बढ़ेगी, इन विमानों का उत्पादन भी उतनी ही तेजी से बढ़ेगा।
तेजस एमके1ए फाइटर जेट किन बातों में है खास?
अब जिस तेजस एमके1ए का एचएएल उत्पादन कर रहा है, उसमें बेहतर डिजिटल रडार वार्निंग रिसिवर, एक ईसीएम पॉड, एक सेल्फ डिफेंस जैमर, एईएसए रडार और उन्नत एवियोनिक्स लगाए गए हैं। ये फाइटर जेट अत्याधनिक शॉर्ट रेंज एयर टू एयर मिसाइल और एक्स्ट्रा एमके-1 एयर टू एयर मिसाइल दागने में सक्षम हैं। इसकी परफॉर्मेंस को काफी सराहा गया है।