NIA की चार्जशीट- प्रदीप शर्मा को दी गई मनसुख मर्डर की सुपारी

मुंबई हिरेन मनसुख मर्डर (Mansukh Hiren murder) की सुपारी पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा (Pradeep Sharma) को दी गई थी। सचिन वाझे (Sachin Vaze) ने मर्डर को अंजाम देने के लिए प्रदीप शर्मा के एनजीओ पी.एस. फाउंडेशन के ऑफिस जाकर 500-500 रुपयों के नोटों से भरा बैग शर्मा को दिया था। एनआईए ने अपनी चार्जशीट में इस बात का खुलासा किया है। हिरेन मनसुख का 4 मार्च को मर्डर किया गया था। एनआईए के अनुसार, मनसुख के मर्डर का टास्क मिलने के बाद प्रदीप शर्मा ने इस केस में आरोपी संतोष शेलार को फोन किया कि क्या वह यह कत्ल करेगा। शेलार तैयार हो गया।

सचिन वाझे ने इस मर्डर की साजिश के लिए 2 मार्च को सीआईयू के अपने ऑफिस में एक मीटिंग बुलाई, जिसमें प्रदीप शर्मा और क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर सुनील माने को भी बुलाया। हिरेन मनसुख पहले से ही वहां था। एनआईए का कहना है कि वाझे ने शर्मा और माने को मनसुख को पहचानने के लिए अपने ऑफिस बुलाया था। उसी दिन शाम को सचिन वाझे चकाला, अंधेरी में सुनील माने से एक बार फिर मिले और उन्हें बुकी नरेश गौड़ की ओर से उपलब्ध कराया गया सिम कार्ड और एक मोबाइल हैंडसेट दिया और इसे अपने घर से बहुत दूर जाकर ऐक्टिवेट करने को कहा।

दूसरी ओर प्रदीप शर्मा ने संतोष शेलार से उस टवेरा गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर मांगा, जिसका इस्तेमाल मनसुख मर्डर के लिए किया जाना था। सुनील माने को सचिन वाझे के दिए सिम कार्ड में कुछ प्रॉब्लम था, इसलिए सुनील माने 3 मार्च को सचिन वाझे के ऑफिस गए और पिछले दिन दिए गए सिम और मोबाइल फोन को रिटर्न कर दिया। इस पर वाझे उसी दिन फिर माने से चकाला में मिले। उन्हें नया मोबाइल और सिम दिया और कहा कि तुम इसी सिम से तावड़े नाम से मनसुख को फोन करना और उसे ठाणे में बुला लेना। वहां मनसुख को संतोष शेलार सहित उन कॉन्ट्रैक्ट किलर को सौंप दिया जाएगा, जिन्हें प्रदीप शर्मा ने मनसुख के कत्ल का जिम्मा सौंपा था।

संतोष शेलार ने कत्ल की इस साजिश में अपने साथ आनंद जाधव, सतीश मोथीकरी, मनीष सोनी को भी शामिल किया। आनंद जाधव ने भी एक गाड़ी की जुगाड़ की। 3 मार्च को क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर सुनील माने ने भी अपने किसी परिचित से इस मर्डर की साजिश को अंजाम देने के लिए एक गाड़ी ले ली। 4 मार्च की देर रात मनसुख का कत्ल कर दिया गया।

एनआईए का कहना है कि मर्डर के बाद संतोष शेलार, सतीश मोथकुरी और मनीष सोनी दिल्ली भाग गए और वहां पहाड़ गंज के एक होटल में रुके। वहां से ये लोग लखनऊ और फिर नेपाल भाग गए। नेपाल में ये लोग चार दिन रुके। बाद में वापस दिल्ली आए। वहां से अहमदाबाद गए और फिर वापस मुंबई आए।

एनआईए का कहना है कि नेपाल से वापसी के बाद प्रदीप शर्मा के निर्देश पर संतोष शेलार ने मनीष सोनी का मुंबई से दुबई का एयर टिकट निकाना। प्रदीप शर्मा का मानना था कि मनीष सोनी कमजोर लिंक है। अगर वह पकड़ गया, तो हम सबकी पोल खुल जाएगी। चार्जशीट में यह दावा किया गया है कि प्रदीप शर्मा ने संतोष शेलार को मनसुख के मर्डर के लिए मोटी रकम दी। वह रकम शर्मा को सचिन वाझे से मिली थी।

एनआईए ने अपनी चार्जशीट में लिखा है कि पुलिस महकमे से जुड़े सचिन वाझे, प्रदीप शर्मा और सुनील माने टेररिस्ट गैंग के मेंबर्स थे, क्योंकि उन्होंने अपने कृत्य से टेरर फैलाने का काम किया। एनआईए ने इन सभी पर यूएपीए लगाया है। यह धारा आतंकवादी गतिविधियों के लिए ही लगती है।

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