अपना केसरी लॉज एवं केसरी लॉज में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पर पुलिस की दबिश

भिलाई। भिलाई में बीती रात दुर्ग पुलिस ने दो लॉज में छापेमारी की कार्रवाई की है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 16-17 दिसंबर 2024 की रात को दुर्ग पुलिस ने पावर हाउस स्थित केसरी लॉज और अपना केसरी लॉज में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पर छापेमारी की। इस कार्रवाई का नेतृत्व पुलिस अधीक्षक जितेन्द्र शुक्ला, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन राठौर, नगर पुलिस अधीक्षक हरिश पाटिल, उप पुलिस अधीक्षक हेमप्रकाश नायक और अन्य पुलिस अधिकारियों ने किया। पुलिस टीम में निरीक्षक कपिल देव पांडे, निरीक्षक महेश ध्रुव, निरीक्षक अम्बर सिंह भारद्वाज, निरीक्षक तापेश्वर सिंह नेताम और उप निरीक्षक वरूण देवता सहित अन्य कर्मचारी शामिल थे।

पुलिस को सूचना मिली थी कि अपना केसरी लॉज और केसरी लॉज में संदिग्ध गतिविधियाँ हो रही हैं। पुलिस ने दोनों लॉजों में रात्रि को दबिश दी और लॉज में ठहरे व्यक्तियों की जांच की। इस जांच में पता चला कि लॉज में ठहरे व्यक्तियों ने थाना छावनी में अपनी जानकारी नहीं दी थी, और न ही लॉज के रजिस्टर में उनकी तसदीक़ी की पुख्ता जानकारी दर्ज थी।

लॉज में कुल 29 संदिग्ध लोग पाए गए, जिनमें विभिन्न राज्यों से आए लोग शामिल थे:

  • पुणे (महाराष्ट्र) से 1,
  • दरभंगा (बिहार) से 6,
  • सिरसा (हरियाणा) से 1,
  • इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) से 6,
  • गोपालगंज (उत्तर प्रदेश) से 1,
  • मेदिनापुर (पश्चिम बंगाल) से 1,
  • झारखंड के बोकारो से 3,
  • और अन्य राज्य जैसे पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से 10 लोग शामिल थे।

पुलिस ने इन संदिग्ध लोगों के खिलाफ 128 बीएनएसएस के तहत प्रतिबंधात्मक कार्यवाही की। केसरी लॉज के मैनेजर संजीव गुप्ता और अपना केसरी लॉज के मैनेजर हर्षदीप सिंह के खिलाफ 170 बीएनएसएस के तहत प्रतिबंधात्मक कार्यवाही की गई, और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने यह पाया कि लॉज में ठहरे व्यक्तियों ने बिना सूचना के आश्रय लिया था, और इनकी जांच में कोई पुख्ता जानकारी रजिस्टर में दर्ज नहीं थी।

पुलिस ने इन संदिग्ध लोगों के खिलाफ 128 बीएनएसएस के तहत प्रतिबंधात्मक कार्यवाही की। केसरी लॉज के मैनेजर संजीव गुप्ता और अपना केसरी लॉज के मैनेजर हर्षदीप सिंह के खिलाफ 170 बीएनएसएस के तहत प्रतिबंधात्मक कार्यवाही की गई, और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने यह पाया कि लॉज में ठहरे व्यक्तियों ने बिना सूचना के आश्रय लिया था, और इनकी जांच में कोई पुख्ता जानकारी रजिस्टर में दर्ज नहीं थी।

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