सुप्रीम कोर्ट से रानू साहू को मिली जमानत,कोयला घोटाले में हुई थी गिरफ्तारी

रायपुर: पहले डीएसपी और फिर 2010 में यूपीएससी क्लियर कर कलेक्टर। यह कहानी है छत्तीसगढ़ कैडर की आईएएस अधिकारी रानू साहू की। इन दिनों वह जेल में बंद हैं। रानू साहू के खिलाफ ईडी ने कोयला घोटाले और भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था। एक साल से जेल में बंद रानू साहू को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। सोमवार को कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी है। जमानत मिलने के बाद ही रानू साहू एक बार फिर से सुर्खियों में आ गई हैं। वैसे रानी साहू का विवादों से नाता रहा है। आइए जानते हैं कि कौन हैं निलंबित आईएएस अधिकारी रानू साहू।

रानू साहू 2010 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। उनका जन्म छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में हुआ। बचपन से ही उनकी रुचि पढ़ाई-लिखाई में थी। वह अपने स्कूल और कॉलेज की होनहार छात्रों में गिनी जाती थीं। कहा जाता है कि उन्हें पुलिस की वर्दी बहुत पसंद थी। इसलिए उन्होंने पुलिस विभाग ज्वाइन करने का सपना देखा था। रानू साहू के पति का नाम जयप्रकाश मौर्य है। वह मंत्रालय में पदस्थ हैं।

2005 में बनीं डीएसपी

रानू साहू के बारे में कहा जाता है कि वह शुरू से ही पुलिस की वर्दी पहना चाहती थीं। इसलिए कॉलेज के दिनों से ही उन्होंने तैयारी शुरू कर दी थी। साल 2005 में रानू साहू का सिलेक्शन डीएसपी के लिए। उन्होंने डीएसपी की नौकरी भी ज्वाइन की। उसके बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की।

2010 में क्लियर किया यूपीएसरी

DSP के पोस्ट पर सिलेक्शन के बाद रानू साहू ने यूपीएससी क्लियर का सपना चुना। इसके लिए उन्होंने जमकर तैयारी की। नौकरी में रहते हुए उन्होंने यूपीएससी की तैयारी की। 2010 में उन्होंने यूपीएससी क्लियर की और छत्तीसगढ़ कैडर की IAS अधिकारी बनीं। रानू साहू पहली बार कांकेर जिले की कलेक्टर बनकर पहुंची। इसके बाद वह छत्तीसगढ़ के कई जिलों की कलेक्टर रहीं और मंत्रालय में कई अहम जिम्मेदारियों को संभाला।

कांग्रेस सरकार में थी जिम्मेदारी

रानू साहू की गिनती उन अधिकारियों में होती है जिनका कांग्रेस की सरकार में बड़ा रसूख था। रानू साहू राज्य कृषि विभाग में निदेशक भी रहीं। हालांकि अपनी कार्यशैली के कारण वह विवादों में भी रहीं। छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री जयसिंह अग्रवाल से विवाद के बाद उनकी शियकायत हुई थी।

क्या है कोयला घोटाला

जब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी उसी दौरान कोयला घोटाला सामने आया था। ईडी ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में कई अधिकारी और कारोबारी एक संगठित गिरोह चलाकर कोयले के परिवहन में 25 रुपए प्रति टन की वसूली कर रहे हैं। इस मामले में ईडी ने पूरे छत्तीसगढ़ में ताबड़तोड़ छापेमारी की। ईडी के अनुसार, कोयला घोटाले में कारोबारी, कांग्रेस पार्टी के नेता और कई बड़े अफसर शामिल थे। करीब 540 करोड़ रुपए से अधिक का घोटाला किया गया। इसी मामले में ईडी ने रानू साहू को गिरफ्तार किया था।

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