पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की ओर से झीरमकांड मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की जांच पर उठाए गए प्रश्नों का मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि यदि भूपेश बघेल के पास झीरम घाटी कांड से संबंधित कोई साक्ष्य था, तो उन्हें उसे एनआईए को सौंपना चाहिए था। भूपेश बघेल हमेशा यही कहते रहे हैं कि सबूत उनकी जेब में हैं, फिर जांच एजेंसी को क्यों नहीं दिया?





मुख्यमंत्री साय ने यह टिप्पणी रविवार को बिलासपुर के बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित तीजा-पोरा कार्यक्रम में शामिल होने से पहले रायपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान की। उन्होंने झीरम घाटी हमले पर आए हालिया फैसले, कांग्रेस के बयानों और भूपेश बघेल को पंजाब कांग्रेस से हटाकर असम का प्रभारी बनाए जाने पर भी तंज कसा।
सीएम साय ने कहा कि झीरमकांड की जांच एनआईए को सौंपी गई थी, जबकि उस समय केंद्र में यूपीए की सरकार थी। एनआईए ने लंबी जांच प्रक्रिया के तहत 100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए, जिसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया और 10 से अधिक आरोपितों को दोषी ठहराया। अदालत 16 सितंबर को दोषियों की सजा का ऐलान करेगी।
बतादें कि 25 मई 2013 को सुकमा से केशलूर लौट रही कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर माओवादियों ने हमला किया था, जिसमें 32 लोगों की मौत हुई थी। मारे गए लोगों में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश, विपक्ष के पूर्व नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और वरिष्ठ नेता उदय मुदलियार जैसे बड़े नाम शामिल थे। इस मामले में अदालत ने 10 आरोपितों को दोषी ठहराया है, इसके बाद से राजनीति गरमाई हुई है।
