
-महापौर बोलीं,हरेली हमारी खेती, संस्कृति और प्रकृति से जुड़ी परंपरा; सभापति ने बताया पर्व का महत्व,





दुर्ग/12 अगस्त/नगर पालिक निगम/ सावन अमावस्या के अवसर पर बुधवार को छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोकपर्व एवं छत्तीसगढ़ का पहला त्योहार माने जाने वाले हरेली तिहार का नगर पालिक निगम दुर्ग द्वारा धूमधाम और पारंपरिक उल्लास के साथ आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ी संस्कृति, खेती-किसानी और प्रकृति से जुड़े इस पर्व के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण एवं शहर में हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि उपज मंडी परिसर, धमधा रोड में सुबह 10 बजे कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ महापौर अलका बाघमार ने सभापति श्याम शर्मा, प्रभारी आयुक्त मोहेंद्र साहू एवं जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में छत्तीसगढ़ महतारी के तैलचित्र पर पूजा-अर्चना कर किया। इस अवसर पर अच्छी फसल एवं सुख-समृद्धि की कामना करते हुए गोधन तथा कृषि कार्यों में उपयोग किए जाने वाले पारंपरिक औजारों की विधिवत पूजा की गई। हरेली पर्व की परंपराओं को जीवंत करते हुए जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने गेड़ी चलाकर पर्व की रौनक बढ़ाई।
-एक पेड़ मां के नाम के संदेश के साथ 150 से अधिक पौधों का रोपण, पारंपरिक खेलों ने बढ़ाया उत्साह
हरेली तिहार के अवसर पर कृषि मंडी परिसर में महापौर अलका बाघमार ने सभापति श्याम शर्मा, एमआईसी सदस्य देव नारायण चन्द्राकर, काशीराम कोसरे, नरेंद्र बंजारे, लीना दिनेश देवांगन, शेखर चन्द्राकर, ज्ञानेश्वर ताम्रकर, शिव नायक, हर्षिका संभव जैन एवं पार्षद युवराज कुंजम सहित जनप्रतिनिधियों के साथ “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत 150 से अधिक पौधों का रोपण किया। पौधारोपण के माध्यम से शहरवासियों को पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और हरियाली के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में पटरीपार क्षेत्र की महिलाओं ने फुगड़ी सहित विभिन्न पारंपरिक खेलों में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
हरेली पर्व के पारंपरिक रंग को बनाए रखते हुए उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने गेड़ी चलाकर लोगों का उत्साहवर्धन किया। पर्यावरण प्रेमी एवं स्वच्छ सर्वेक्षण ब्रांड एंबेसडर डॉ. विश्वनाथ पाणिग्राही द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान “एक पेड़ मां के नाम” को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार किए गए पोस्टर के माध्यम से भी पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। उपस्थित अतिथियों ने पोस्टर के साथ लोगों को अधिक से अधिक पौधरोपण एवं पौधों के संरक्षण का संकल्प दिलाया।
