थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। शाहाबाद प्रक्षेत्र के डीआइजी सत्य प्रकाश ने भोजपुर एसपी मिस्टर राज के अनुसंशा पर कर्तव्य अनुपालन में लापरवाही बरतने के आरोप में तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर राजेश मालाकार सहित पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है।

निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में एसआई हरिश्चंद्र कुमार, एसआई अंकित आर्यन, एएसआई रामाशंकर यादव तथा महिला सिपाही मीना कुमारी शामिल हैं। डीआइजी द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।






बताया जाता है कि बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर मामले की जांच के दौरान संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका और कर्तव्य निर्वहन में गंभीर त्रुटियां सामने आई थीं।
इसी आधार पर शाहाबाद प्रक्षेत्र के डीआईजी ने विभागीय कार्रवाई करते हुए सभी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया है।
इस कार्रवाई को भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर प्रकरण में अब तक की सबसे बड़ी विभागीय कार्रवाई माना जा रहा है। मामले की जांच और विभागीय प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
भरत तिवारी प्रकरण में प्रशांत किशोर को महापंचायत में आने का निमंत्रण
पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भोजपुर जिले के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी के स्वजन एवं उनके मित्रों ने सोमवार को जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर से बिहटा स्थित बिहार नवनिर्माण आश्रम में मुलाकात की। इस दौरान स्वजनों ने भरत तिवारी प्रकरण में न्याय दिलाने की मांग करते हुए प्रशांत किशोर से हस्तक्षेप करने की अपील की।
उन्होंने प्रशांत किशोर को 24 जून को आयोजित होने वाली पंचायत में शामिल होने का भी आग्रह किया। इस पर प्रशांत किशोर ने परिजनों को भरोसा दिलाया कि न्याय की इस लड़ाई में जन सुराज उनके साथ खड़ा रहेगा और हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।
पुलिस की कथित मुठभेड़ में मारे गए बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी के परिजनों को न्याय दिलाने की मांग को लेकर आंदोलन ने नया रूप ले लिया है। बेतिया से आए सामाजिक कार्यकर्ता सचिन मिश्रा ने बिलौटी गांव में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया है।
अनशन पर बैठने से पहले उन्होंने अपने सिर का मुंडन कराया और इसे बिहार सरकार के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध बताया। अनशन स्थल पर सचिन मिश्रा ने कहा कि भरत भूषण तिवारी की मौत एक फर्जी मुठभेड़ का परिणाम है और जब तक इस मामले में शामिल दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।
