



डॉ. टेसी थॉमस देश की दिग्गज महिला साइंटिंस्ट हैं, जिन्होंने मिसाइल प्रोजेक्ट का नेतृत्व किया। उन्होंने अग्नि मिसाइल कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारतीय सेना ने उनकी जर्नी पर एक पॉडकास्ट को लेकर अहम पोस्ट किया है। जानिए पूरा मामला।

क्या आपको पता है भारत की मिसाइल वुमेन कौन हैं? जी हां हम बात कर रहे डॉ. टेसी थॉमस की। एक ऐसी युवा इंजीनियर जिसने अपनी मेहनत के बल पर उस मुकाम को हासिल किया जिसका सपना हर युवा देखता है। टेसी थॉमस ने अपने हर प्रोजेक्ट को बड़ी जिम्मेदारी से संभाला। ऐसा हो भी क्यों नहीं आखिर प्रोजेक्ट देश की सुरक्षा से जो जुड़ा था। डॉ. टेसी थॉमस कैसे एक महिला साइंटिस्ट से’अग्नि पुत्री’ के नाम से चर्चित हुईं, अपने जीवन में उन्होंने कौन-कौन से जिम्मेदारी संभाली, अपने संघर्ष की पूरी कहानी वो एक पॉडकास्ट खुद बताएंगी। जानें डॉ. टेसी थॉमस का प्रोफाइल।
डॉ. टेसी थॉमस का मिसाइल वुमन ऑफ इंडिया बनने का सफर काफी प्रेरणादायक रहा है।
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1984 में इसरो से बतौर इंटर्न की थी।
उस वक्त उन्होंने सैटेलाइट और लॉन्च व्हीकल के डिजाइन पर काम किया था।
शुरुआत से ही इनोवेटिव आइडिया पर काम करने वालीं डॉ. टेसी 1988 में डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन ( DRDO) के साथ जुड़ी।
फिर उन्होंने डिफेंस के क्षेत्र में नई पीढ़ी की बैलिस्टिक मिसाइल पर काम करना शुरू किया।
उनकी लगन और मेहनत को देखते हुए एपीजे अब्दुल कलाम ने अग्नि परियोजना के लिए नियुक्त किया था। जिसके बाद ही उन्हें मिसाइल वुमन ऑफ इंडिया कहा जाने लगा।
डॉ टेसी थॉमस का बचपन काफी बुरे दौर से गुजरा था। जब टेसी महज 13 साल की थीं तो उनके पिता लकवाग्रस्त हो गए थे। जिसके बाद उनके घर पर पैसों की कमी होने लगी। बावजूद इसके कभी भी उन्होंने अपने सपने को टूटने नहीं दिया। उनकी मेहनत ही है कि भारत ने साल 2012 में पहली बार 5000 किलोमीटर की रेंज वाली अग्नि 5 मिसाइल का सफल परीक्षण कर पाया था। डॉ टेसी थॉमस को बचपन से ही गणित पसंद था। स्कूल के दिनों में सबसे ज्यादा नंबर उनके गणित में ही आते थे।
टेसी थॉमस ने 1985 में कालीकट यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में बीटेक किया। उसके बाद उन्होंने पुणे के इंस्टीट्यूट ऑफ आर्मामेंट टेक्नोलॉजी (वर्तमान में डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस टेक्नोलॉजी) से गाइडेड मिसाइलों में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में पोस्ट ग्रेजुएशन भी किया है। उन्होंने डीआरडीओ से पीएचडी भी की है। डॉ. टेसी थॉमस को DRDO की तरफ से कई बार अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। उसके बाद उन्हें अग्नि अवॉर्ड भी दिया गया।
मिसाइल के क्षेत्र में भारत को आगे ले जाने के लिए उन्हें लाल बहादुर शास्त्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। उसके बाद दो साल पहले साल 2022 में उन्हें एपीजे अब्दुल कलाम आजाद के अवार्ड से सम्मानित किया गया था। डीआरडीओ की पूर्व महानिदेशक (Avionics System) रहीं डॉ. टेसी थॉमस ने आईआईटी दिल्ली के 56वें दीक्षांत समारोह में युवाओं को खास मैसेज दिया था।
उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब दुनिया तेजी से डिजिटल हो रही है, नई प्रौद्योगिकियों को अपनाना और यह सुनिश्चित करना कि वे प्रौद्योगिकियां ‘नैतिक, समावेशी और टिकाऊ’ हों। ‘भविष्य के इंजीनियर्स, वैज्ञानिकों, उद्यमियों और नेताओं’ के लिए एक बड़ी चुनौती है।
भारतीय सेना के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से मिसाइल वुमेन डॉ. टेसी थॉमस को लेकर पोस्ट शेयर किया गया है। इसमें कहा गया है कि एक युवा इंजीनियर से लेकर भारत के मिसाइल कार्यक्रम का चेहरा बनने तक, डॉ. टेसी थॉमस उन फैसलों और पलों का हिस्सा रही हैं, जिनका महत्व सुर्खियों से कहीं ज़्यादा है। एक पॉडकास्ट में वो अपने जिंदगी को लेकर खुलकर बात करेंगी। एक्स पोस्ट के मुताबिक, ‘रक्षा सूत्र’ का यह एपिसोड आपको उन उपलब्धियों के पीछे छिपी शख्सियत को करीब से रूबरू कराता है।
