



बस्तर में माओवादी नेटवर्क के अंतिम मजबूत स्तंभ भी अब दरकते नजर आ रहे हैं। हिड़मा की बटालियन का डिप्टी कमांडर और 25 लाख रुपये का इनामी सोढ़ी केशा ने बुधवार को अपने 40 साथियों के साथ तेलंगाना पुलिस के समक्ष समर्पण कर दिया।

इसके साथ ही स्पेशल जोनल कमेटी स्तर का वह आखिरी सक्रिय कमांडर भी हथियार डाल चुका है, जो लंबे समय से छत्तीसगढ़ के सुकमा इलाके में क्रिय था। बस्तर आइजी सुंदरराज पी. ने कहा है कि सोढ़ी के साथ व उसकी टीम के तेलंगाना पुलिस के समक्ष हथियार लेकर पहुंचने की जानकारी है, परंतु अभी तेलंगाना पुलिस की ओर से आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार कर्रेगुट्टा अभियान के बाद सुरक्षा बलों के दबाव में केशा अपनी टीम के साथ तेलंगाना भाग गया था। इसके बाद वह लगातार ठिकाने बदलता रहा, लेकिन सघन घेराबंदी और खुफिया निगरानी के आगे आखिरकार झुक गया। जनवरी 2024 में धर्मावरम पुलिस कैंप पर हमले के बाद वह सुर्खियों में आया था, जबकि नवंबर 2025 में अन्नाराम मुठभेड़ से बच निकलना उसकी आखिरी बड़ी सक्रियता मानी जा रही थी।
केशा के साथ डिविजनल कमेटी सदस्य मंगथू, एरिया कमेटी सदस्य महेंद्र, प्लाटून पार्टी कमेटी सदस्य मोड़ियम रिंकू समेत कई अहम कैडर ने भी सरेंडर किया है। इनमें पोड़ियम चंद्री, मडाकम नरेश, पूनम ऐथे, सोढ़ी भीमा, मोड़ियम रीना और सोढ़ी रंजीत शामिल हैं।
भद्राचलम के प्लाटून कमांडर मधु के भी समर्पण की खबर है। सभी कैडर अपने साथ एके-47, इंसास और एसएलआर जैसे स्वचालित हथियार लेकर सामने आए। सूत्रों के अनुसार, केशा पीएलजीए में कंपनी-2 का प्रभारी और बटालियन का उप-कमांडर था। उसके समर्पण के साथ ही तेलंगाना में माओवादी बटालियन का संगठित ढांचा लगभग खत्म माना जा रहा है।
इधर, पुलिस आकलन के मुताबिक अब बस्तर में केवल दो प्रमुख माओवादी कमांडर विज्जल और रूपी ही सक्रिय बचे हैं। विज्जल के कर्रेगुट्टा क्षेत्र में छिपे होने की सूचना है, जबकि रूपी उत्तर बस्तर में गतिविधियां संचालित कर रही है। दोनों ने अब तक समर्पण से इनकार किया है, जिससे सुरक्षा बलों के लिए यह अंतिम चरण की लड़ाई मानी जा रही है।
माओवादी ढांचा हो गया ध्वस्त
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हाल ही में देश को माओवादी हिंसा से लगभग मुक्त घोषित करते हुए कहा था कि अब गिने-चुने माओवादी ही बचे हैं, जो हिंसक लड़ाई को आगे बढ़ाने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया था कि ये शेष कैडर भी देर-सवेर या तो समर्पण करेंगे या मुठभेड़ों में मारे जाएंगे। मार्च 2026 तक माओवादी हिंसा के समूल सफाये के लक्ष्य के तहत देशभर में आक्रामक अभियान चलाया गया। इसके परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ में ही 500 से अधिक माओवादी मुठभेड़ों में मारे गए। इनमें बसव राजू, चलपति, गुड्सा उसेंडी, कोसा समेत 12 केंद्रीय समिति सदस्य शामिल थे, जिनमें से 9 छत्तीसगढ़ में ढेर हुए। इसके अलावा, केंद्रीय वैचारिक संगठन के प्रमुख भूपति और केंद्रीय सैन्य आयोग प्रमुख देवजी जैसे शीर्ष नेताओं के प्रभाव खत्म होने के साथ 2900 से अधिक माओवादी समर्पण कर चुके हैं। इन घटनाक्रमों के बाद बस्तर में माओवादी संगठन का ढांचा अब पूरी तरह बिखर चुका है।