



ईरान का जो जंगी जहाज हिंद महासागर में अमेरिका ने डुबो दिया, उसपर सवार सारे नौ सैनिकों की जान बच सकती थी। आईआरआईएस डेना के कमांडर ने चेतावनी मिलने के बाद भी क्रू को समुद्र में कूद कर जान बचाने की अनुमति नहीं दी।


4 मार्च,2026 की सुबह हिंद महासागर में अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी ने जिस ईरानी युद्धपोत को मार्क 48 टॉरपीडो मारकर डुबो दिया, उसे इस हमले की भनक पहले ही मिल गई थी। आईआरआईएस डेना (IRIS Dena) पर मंडरा रहे मौत के खतरे से ईरानी जंगी जहाज पर अफरा-तफरी मची हुई थी। ईरानी नौसैनिक जान बचाने के लिए कूदना चाहते थे, लेकिन उन्हें ऐसा करने से रोक दिया गया।
ईरानी उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह भारत में रायसीना डायलॉग में कह चुके हैं कि विशाखापत्तनम में मिलन 2026 में भाग लेकर ईरान लौट रहे आईआरआईएस डेना पर कोई हथियार नहीं था और वह खाली था। अब जो जानकारी सामने आ रही है कि अगर उस युद्धपोत के कमांडर ने नौसैनिकों को समुद्र में कूदने से नहीं रोका होता तो शायद ज्यादातर नाविकों की जान बचाई जा सकती थी।
अमेरिकी सेना ने आईआरआईएस डेना पर पनडुब्बी से हमला करने के पहले दो बार चेतावनी दी थी और यहां तक हिदायत दी थी कि ईरानी युद्धपोत पर जो भी क्रू सवार हैं, वह उसे तुरंत खाली कर दें। ईरान इंटरनेशनल को यह जानकारी एक ईरानी नाविक के पारिवारिक सूत्र से मिली है। इसके अनुसार उसने टॉरपीडो हमले से ठीक पहले अपने पिता से बात की थी। इस हमले में वह नौसैनिक भी मारा गया
ईरानी जहाज पर सवार नौसैनिक जान पर जोखिम को देखते हुए उसे तुरंत खाली करना चाहते थे, लेकिन उनके कमांडर ने इसकी अनुमति नहीं दी। इसकी वजह से क्रू सदस्यों के साथ काफी विवाद भी हो गया और हमले से पहले जहाज पर बहुत ही तनावपूर्ण हालात बन चुके थे। एक तरफ अमेरिकी हमले की वजह से मौत का खौफ और दूसरी तरफ कमांडर की जिद
सूत्र ने जानकारी दी कि ‘कई नौ सैनिकों ने कमांडर से जोरदार बहस की’। रिपोर्ट के अनुसार इस हमले में श्रीलंकाई नेवी की मदद से जो 32 लोग बच पाए हैं, उनमें से ज्यादातर वही हैं, जिन्होंने कमांडर के फरमान को ठुकरा कर हमले से ठीक पहले लाइफबोट का सहारा ले लिया था।
आईआरआईएस डेना पर अमेरिकी पनडुब्बी ने 4 मार्च, 2026 की सुबह मार्क 48 टॉरपीडो से हमला किया।
ईरानी युद्धपोत श्रीलंका के दक्षिणी तट पर मौजूद गाले बंदरगाह से करीब 35 किलोमीटर (19 नॉटिकल मील) दूर हिंद महासागर में डूब गया।
श्रीलंकाई नेवी जब आपात संदेश पाकर मौके पर पहुंची, तब वहां ईरानी वॉरशिप का नामोनिशान भी मौजूद नहीं था।
वहां पर सिर्फ जहाज के तेल की परत, खाली लाइफ राफ्ट और समुद्र में कूदने वाले 32 ईरानी नौ सैनिक तैर रहे थे।
आईआरआईएस डेना अमेरिकी यूएसएस शार्लोट ने हमला किया और हमले के चंद मिनटों में ही ईरानी युद्धपोत हिंद महासागर में समा गया।
ईरानी युद्धपोत पर लगभग 180 लोग सवार थे, जिनमें से 87 शव बरामद किए गए।
रॉयटर्स के अनुसार 6 मार्च को अमेरिका ने श्रीलंका से कहा कि वह आईआरआईएस डेना से सुरक्षित बचाए गए 32 नौ सैनिकों को ईरान को न सौंपें।
अमेरिका ने ईरान के एक और नौ सैनिक जहाज आईआरआईएस बूशहर से रेस्क्यू किए गए 208 नाविकों को भी उसे नहीं सौंपने को कहा है।