धर्मापुर मिशनरी आश्रम मामले में विदेशी नेटवर्क की आशंका, आरोपी के संबंध अमेरिका से जुड़े।

धर्मापुर गांव में मिशनरियों के आश्रम में कांकेर के आमाबेड़ा के आदिवासी बच्चों को अवैध तरीके से रखने का मामला अब विदेशी फंडिंग से जुड़ता दिखाई दे रहा है। फारेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (एफसीआरए) की जांच इस प्रकरण में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पिछले दो दिनों से दो आइपीएस सहित तीन पुलिस अधिकारियों की टीम आश्रम संचालक डेविड चाको से लगातार पूछताछ कर रही है।

जानकारी के अनुसार, डेविड चाको और उसके परिवार के सदस्यों के नाम पर जिले और प्रदेश भर में कई स्थानों पर भूमि खरीदी गई है। यह भी बताया जा रहा है कि डेविड नियमित रूप से विदेश यात्रा करता है, और उसके संबंध संयुक्त राज्य अमेरिका से जुड़े हुए हैं। वह स्वयं को पेंटागोस चर्च, बिलासपुर का प्रतिनिधि बताता है। अब डेविड जिस नेटवर्क का हिस्सा है, वह पूरी तरह से इस जांच के दायरे में आ रहा है।

ग्राम पनेका में भी एक मिशनरी केंद्र की स्थापना की जा रही है, जहां लगभग एक करोड़ की लागत से भवन तैयार किया गया है और यहां सैकड़ों लोग जुटते हैं। जिले में ऐसे अन्य लोगों की सक्रियता की जानकारी भी सामने आ रही है। ग्राम पाटेकोहरा में गुरुवार को अनुसूचित जनजाति की एक बड़ी सभा बुलाई गई है। इस बैठक में मतांतरण के हालिया मामलों और जिले में मिशनरियों की गतिविधियों को लेकर आदिवासी समाज महत्वपूर्ण निर्णय लेने की तैयारी कर रहा है।

 

पांच साल की जेल का प्राविधान

एफसीआरए के तहत विदेशी फंडिंग से जुड़े मामलों की निगरानी केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा की जाती है। इस कानून के तहत गंभीर उल्लंघनों पर पांच साल की सजा और जुर्माने का प्राविधान है।

 

मिशनरी गतिविधियां चिंता का विषय

मदन नेताम, अध्यक्ष, ओड़ारबांध महासभा ने कहा कि राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में मिशनरी गतिविधियां बढ़ रही हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Previous post सड़क सुरक्षा माह 2026 के दौरान जागरूकता कार्यक्रम के साथ-साथ आज दिनांक को नाबालिक द्वारा वाहन चलाने पर की गई कार्रवाई
Next post रायपुर में मां को पूछताछ के लिए थाने ले गई पुलिस, सदमे में 18 साल की बेटी ने की आत्महत्या।