2000 स्‍पेशल कमांडोज से घिरे रहते थे न‍िकोलस मादुरो, हर रात बदलते थे बिस्तर, फोन छूने से भी डरते थे, फ‍िर केसे हुए ग‍िरफ्तार।

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सुरक्षा ऐसी थी कि परिंदा भी पर न मार सके. 24 घंटे तैनात 2000 एलीट कमांडो, क्यूबा के खूंखार जासूस और हर रात बदलता सोने का ठिकाना… फिर भी अमेरिकी सेना उन्हें बेडरूम से उठाकर ले गई. आखिर कहां सोता रह गया वो अभेद्य सुरक्षा दस्ता?

वेनेजुएला की राजधानी काराकस में स्थित राष्ट्रपति भवन मिराफ्लोरेस पैलेस या उनके गुप्त बंकर, जिन्हें दुनिया का सबसे सुरक्षित ठिकाना माना जाता था, आज वीरान हैं. जिस शख्स की सुरक्षा में 24 घंटे 2,000 खूंखार स्पेशल कमांडो तैनात रहते थे, जिसके बेडरूम तक हवा भी चेक होकर गुजरती थी, उसे अमेरिकी सेना ने मक्खी की तरह निकालकर बाहर फेंक दिया. सबसे बड़ा सवाल यह है क‍ि आखिर मादुरो का वो ‘अभेद्य किला’ कैसे ढह गया? वह ‘प्रेसिडेंशियल गार्ड’ कहां था, जिसकी कसमें मादुरो खाते थे? रिपोर्ट्स बताती हैं कि जब अमेरिकी बल मादुरो को उनके बेडरूम से खींच रहे थे, तो उनकी हिफाजत के लिए एक भी गोली नहीं चली

निकोलस मादुरो को अपनी जान का डर हमेशा सताता रहता था. यही वजह थी कि उनकी सुरक्षा किसी आम राष्ट्रपति जैसी नहीं, बल्कि एक डरे हुए तानाशाह जैसी थी. उनकी सुरक्षा का जिम्मा गार्डिया डी ऑनर प्रेसिडेंशियल के पास था. लगभग 2,000 से ज्यादा एलीट कमांडो सिर्फ मादुरो की सांसों की पहरेदारी करते थे. ये कोई आम सैनिक नहीं थे. इन्हें वेनेजुएला की आर्मी, एयरफोर्स और नेवी के सबसे क्रूर और वफादार सैनिकों में से चुना गया था

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों से बचने के लिए मादुरो पैरानोइया यानी अत्यधिक डर के शिकार हो चुके थे. कहा जाता है कि मादुरो कभी भी एक ही बिस्तर पर लगातार दो रात नहीं सोते थे. वे काराकस में अलग-अलग सुरक्षित घरों और अंडरग्राउंड बंकरों में छिपकर रात गुजारते थे.

ट्रैक किए जाने के डर से उन्होंने स्मार्टफोन्स का इस्तेमाल बंद कर दिया था. वे सिर्फ बात करने के लिए बर्नर फोन यानी इस्तेमाल करके फेंकने वाले फोन का उपयोग करते थे.

2,000 कमांडोज का चुप रह जाना यह इशारा करता है कि मादुरो के सुरक्षा घेरे में सेंध लग चुकी थी. या तो उनके सबसे करीबी जनरलों ने अमेरिका के साथ सौदा कर लिया था, या फिर वेनेजुएला की सेना खुद मादुरो से छुटकारा पाना चाहती थी. जिस समय मादुरो को ‘उठाया’ जा रहा था, उनके बाहर खड़े पहरेदार शायद मूकदर्शक बने रहने का आदेश मान रहे थे.

सबसे हैरानी की बात यह है कि मादुरो के ‘इनर सर्कल’ में मौजूद क्यूबा के एजेंट भी उन्हें नहीं बचा पाए. जो एजेंट अपनी वफादारी के लिए मशहूर थे, वे या तो न्यूट्रलाइज कर दिए गए या उन्होंने भी हथियार डाल दिए.

टेक्नोलॉजी का वार: संभावना यह भी है कि अमेरिका ने मादुरो की लोकेशंस को पिन-पॉइंट करने के लिए अत्यधिक उन्नत तकनीक का इस्तेमाल किया, जिससे उनके रडार और संचार तंत्र ठप हो गए. जब तक मादुरो को पता चलता, अमेरिकी बूट उनके बेडरूम में थे.

तनी रह गईं बंदूकें, और खेल खत्म

यह ऑपरेशन आधुनिक इतिहास के सबसे सफल और चौंकाने वाले सैन्य अभियानों में गिना जाएगा. 2,000 कमांडोज, मिसाइल सिस्टम, रडार और विदेशी जासूस सब धरे के धरे रह गए. मादुरो को लगता था कि बंदूकों की दीवार उन्हें बचा लेगी, लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि जब दीवारें खुद रास्ता देने लगें, तो किले कितनी जल्दी ढह जाते हैं. मादुरो को उनके बेडरूम से ‘खींचकर’ ले जाना दुनिया के बाकी तानाशाहों के लिए एक डरावना संदेश है क‍ि आप कितनी भी सुरक्षा में क्यों न हों, अगर सुपरपावर ने ठान लिया, और आपके अपने लोग बिक गए, तो आपको बचाने वाला कोई नहीं होगा.

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Previous post आपरेशन विश्वास के तहत दुर्ग पुलिस को मिली सफलता
Next post बेंदरा ल राजा बना दिस’… भूपेश बघेल ने उपमुख्यमंत्री अरुण साव को कहा बंदर, भड़का साहू समाज।