बिना ड्राइवर 1.5 km दौड़ा इंजन सिग्नल तोड़कर भीड़ भरे रास्ते पर रेल इंजन

बिलासपुर रेलवे स्टेशन से ठीक पहले तारबाहर-सिरगिट्टी रेलवे फाटक के पास बड़ा हादसा होने से टल गया। एक ट्रेन का इंजन बिना ड्राइवर स्टार्ट होकर बिलासपुर स्टेशन की ओर लोको शेड से सिरगिट्टी की ओर निकल गया। कुछ दूरी तक पटरी पर दौड़ने के बाद इंजन खंभों और सिग्नल को तोड़ता हुआ सड़क पर उतर गया। इंजन करीब 100 मीटर तक सड़क पर घिसटता रहा। जिस जगह हादसा हुआ, वह शहर का व्यस्ततम इलाका है। गनीमत रही कि इंजन की चपेट में कोई नहीं आया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जब उन्होंने इंजन को पास से देखा तो उसमें कोई ड्राइवर नहीं था। अधिकारियों की पूछताछ में लोको शेड के किसी सफाई कर्मचारी से इंजन स्टार्ट होने और उसके चालू होने की बात सामने आई है।

ह हादसा कैसे हुआ इसे बताने के लिए कोई भी अधिकारी तैयार नहीं है। उनका कहना है कि अभी यह ही तय नहीं हो पा रहा है कि इंजन लोको शेड से किसी पायलट ने निकाला या फिर गलती से किसी से स्टार्ट होकर छूट गया। एक अधिकारी कहते हैं कि बहुत आशंका है कि इंजन किसी की लापरवाही से स्टार्ट ही रह गया और ब्रेक भी नहीं लगे होने के कारण पटरी पर चलने लगा।

एक समय के बाद इंजन को कंट्रोल की जरूरत रहती है। जब उसे कंट्रोल नहीं मिला तो वह पटरी छोड़ सड़क पर उतर गया। यदि इस अधिकारी की बात सच है तो इंजन जिस सिरगिट्टी की तरफ के फाटक के पास उतरा वहां से शेड जहां इंजन खड़े किए जाते हैं की दूरी करीब 1.5 किलोमीटर है। मतलब इंजन बिना ड्राइवर 1 किलोमीटर तक चलता रहा। हालांकि, जांच इस बात की भी की जा रही है कि क्या इंजन में कोई पायलट था और वह हादसा होने के बाद भाग गया, क्योंकि दरवाजा खुला था।

एक लाइन बंद
जिस लाइन से इंजन उतरा उसके ठीक पीछे उसी लाइन पर एक मालगाड़ी आ रही थी। मालगाड़ी के ड्राइवर ने सामने कुछ गड़बड़ देखकर इमरजेंसी ब्रेक लगाए और वह ठीक पीछे खड़ी हो गई। इस हादसे के बाद हावड़ा रूट की एक लाइन बंद हो गई है। रेलवे के अधिकारी-कर्मचारी घटनास्थल पर पहुंच गए हैं और उन्होंने इंजन को हटाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। अधिकारियों के मुताबिक देर रात तक लाइन क्लीयर कर ली जाएगी, लेकिन सिग्नल, बिजली के खंभे जो इस इंजन ने तोड़े हैं उन्हें बनने मे वक्त लगेगा।

सिरगिट्टी-तारबाहर फाटक जहां यह हादसा हुआ है। वहीं अक्टूबर 2011 में धनतेरस की शाम एक भयानक हादसा हुआ था। तब यहां अंडरब्रिज नहीं बना था और लोग रेल की पटरियां पारकर ही आना-जाना करते थे। धनतेरस के दिन इन पटरियों को पार कर लोग सिरगिट्टी जा रहे थे, कि शाम 7 बजे के करीब तेज रफ्तार रायपुर लोकल ने करीब 30 लोगों को रौंद दिया था। इसके बाद यहां अंडरब्रिज बनाया गया। इस दुर्घटना में 12 लोगों की मौत हुई थी और बाकी घायल हुए थे।

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